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दिल्ली में 20,506 ‘अनधिकृत’ आधार लेनदेन, श्रमिक कल्याण बोर्ड ने कंपनी को किया ब्लैकलिस्ट

Published: Thu, 03 Sep 2026 09:53 PM (IST)

दिल्ली निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड ने एक निजी कंपनी, एमडीएस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, को यूआईडीएआई क्रेडेंशियल के दुरुपयोग के आरोप में ब्लैकलिस्ट किया है।

श्रमिक कल्याण बोर्ड ने 20 हजार से अधिक अनधिकृत लेनदेन पर कंपनी को किया ब्लैकलिस्ट।

श्रमिक कल्याण बोर्ड ने 20 हजार से अधिक अनधिकृत लेनदेन पर कंपनी को किया ब्लैकलिस्ट।

HighLights

  1. श्रमिक कल्याण बोर्ड ने कंपनी को किया ब्लैकलिस्ट।

  2. 20,506 अनधिकृत आधार लेनदेन का मामला।

  3. यूआईडीएआई क्रेडेंशियल के दुरुपयोग पर कार्रवाई।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड ने अपने यूआईडीएआई क्रेडेंशियल के दुरुपयोग के मामले में एक निजी कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। बोर्ड के मुताबिक, कंपनी ने काम का ठेका रद होने के बावजूद उसके रजिस्ट्रार/ईए कोड और अन्य आधार संबंधी क्रेडेंशियल का इस्तेमाल करते हुए 20,506 अनधिकृत लेनदेन किए। इनमें 16,532 आधार अपडेट और 3,974 नए आधार नामांकन शामिल हैं।

बोर्ड ने इस मामले में एमडीएस साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ शाहबाद डेयरी थाने में पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई है। साथ ही कंपनी को भविष्य की सरकारी खरीद और टेंडर प्रक्रिया से बाहर रखने की सिफारिश की गई है।

बोर्ड ने वर्ष 2025 में निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित आधार केंद्र के प्रबंधन और संचालन का काम कंपनी को दिया था। बाद में कंपनी के कामकाज और आचरण को लेकर कई शिकायतें मिलीं। जांच के बाद बोर्ड ने उसका कार्यादेश रद कर दिया।

कार्यादेश रद होने के बाद कंपनी ने काम जारी रखा

बोर्ड के एक हालिया आदेश के मुताबिक 14 अगस्त को यूआईडीएआई से मिली सूचना में पता चला कि कार्यादेश रद होने के बाद भी कंपनी बोर्ड के रजिस्ट्रार/ईए कोड और क्रेडेंशियल का इस्तेमाल कर आधार नामांकन और अपडेट का काम करती रही। बोर्ड ने इसे बिना वैध अनुमति के उसके यूआईडीएआई क्रेडेंशियल, आधार ढांचे और रजिस्ट्रार कोड के इस्तेमाल का मामला बताया।

नियमों के तहत उचित कार्रवाई करने की सिफारिश

बोर्ड ने मामले की गंभीरता और जनहित को देखते हुए कंपनी को किसी भी टेंडर, खरीद प्रक्रिया, पैनल में शामिल करने या किसी काम का ठेका देने से ब्लैकलिस्ट कर दिया है। साथ ही यूआईडीएआई, सरकारी ई-मार्केटप्लेस और सरकारी खरीद पोर्टल से भी अपने नियमों के तहत उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की है।

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