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    Delhi Budget 2026: 109 मिनट का बजट भाषण, शेरो-शायरी और चुटकियों के बीच पेश हुआ लेखा-जोखा

    Updated: Tue, 24 Mar 2026 10:03 PM (IST)

    Delhi Budget 2026: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 109 मिनट का बजट भाषण दिया, जिसमें विकास के रोडमैप के साथ आध्यात्मिकता, तीखे कटाक्ष और शायरी का अनूठा मिश ...और पढ़ें

    विधानसभा बजट सत्र में बजट पेश करती मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता साथ में बैठे मंत्री प्रवेश वर्मा। ध्रुव कुमार

    विधानसभा बजट सत्र में बजट पेश करती मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता साथ में बैठे मंत्री प्रवेश वर्मा। ध्रुव कुमार

    HighLights

    1. मुख्यमंत्री ने 'सृजनशक्ति' को नमन कर बजट भाषण शुरू किया।

    2. विपक्ष की अनुपस्थिति पर चुटकी ली, माहौल जीवंत रखा।

    3. शायरी के माध्यम से पूर्व सरकार पर तीखा प्रहार किया।

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। एक घंटे 49 मिनट लंबे अपने बजट भाषण में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता न केवल विकास का रोडमैप रखती नजर आईं, बल्कि उनके संबोधन में आध्यात्मिकता, तीखे कटाक्ष और शायरी का अनूठा संगम भी देखने को मिला।

    शक्ति की आराधना से शुरुआत

    मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण की शुरुआत दिल्ली की ''सृजनशक्ति'' को नमन करते हुए की। उन्होंने शहर की जिजीविषा और बार-बार उठ खड़े होने की क्षमता का श्रेय दैवीय आशीर्वाद को दिया। मुख्यमंत्री ने मां दुर्गा, मां झंडेवाली, मां कालका, मां कात्यायनी और मां संतोषी का आह्वान करते हुए बजट सत्र की मंगल कामना की।

    विपक्ष की अनुपस्थिति पर चुटकी

    पूरे भाषण के दौरान सदन का माहौल काफी जीवंत रहा। जब कभी सत्ता पक्ष के विधायकों की तालियों की गड़गड़ाहट कम होती, तो मुख्यमंत्री मुस्कुराते हुए पूछ लेतीं, 'थक गए क्या?'। वहीं विपक्ष की खाली कुर्सियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने चुटकी ली कि अगर विपक्ष के साथी भी सदन में बैठे होते, तो बजट पढ़ने का आनंद और बढ़ जाता।

    शेरो-शायरी के जरिए पूर्व सरकार पर निशाना

    चांदनी चौक के सुंदरीकरण और बिजली के लटकते तारों को हटाने का ऐलान करते हुए रेखा गुप्ता ने बिना नाम लिए पूर्व की आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने जां निसार अख्तर का शेर पढ़ा-

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    'दिल्ली कहां गई तेरे कूचों की रौनक,
    गलियों से सिर झुकाकर निकलने लगा हूं मैं...'

    इस शेर के माध्यम से उन्होंने पुरानी दिल्ली की बदहाली का जिक्र किया, जिस पर सदन तालियों से गूंज उठा।

    उम्मीदों के साथ समापन

    बजट भाषण के अंत में मुख्यमंत्री ने नई उम्मीदों का संचार करते हुए अपना संबोधन इस शेर के साथ समाप्त किया-

    'दिल्ली की राहों में फिर से उजाला छाने लगा है,
    मेहनत का हर दीप जगमगाने लगा है...
    नई उम्मीदों संग कदम बढ़ाएं हैं,
    हर अधूरे सपने को फिर से हमने सजाए हैं।'

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