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    सावधान! दिल्ली में जनगणना के नाम पर सक्रिय हुए साइबर ठग, घर आने वाले गणनाकर्ता का 'QR कोड' जरूर करें स्कैन

    Updated: Tue, 12 May 2026 11:01 PM (IST)

    जनगणना की आड़ में साइबर अपराधी सक्रिय हो गए हैं, जिससे बचने के लिए गणनाकर्मियों को क्यूआर कोड वाला पहचान-पत्र दिया जा रहा है। ...और पढ़ें

    जनगणना की आड़ में साइबर अपराधी सक्रिय हो गए हैं। इमेज एआई

    जनगणना की आड़ में साइबर अपराधी सक्रिय हो गए हैं। इमेज एआई

    HighLights

    1. साइबर अपराधी जनगणनाकर्मी बनकर कर रहे ठगी।

    2. गणनाकर्मियों के लिए क्यूआर कोड पहचान-पत्र अनिवार्य।

    3. ऑनलाइन स्व-गणना में मानचित्र पर घर पहचान की समस्या।

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। जनगणना की आड़ में साइबर अपराधी भी सक्रिय हो गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई राज्यों में गणनाकर्मी बनकर साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं। अपराधी लोगों को फोन करके या मोबाइल पर मैसेज भेजकर आधार, बैंक खाता सहित अन्य जानकारी मांगते हैं।

    ओटीपी और लिंक भेजकर धोखाधड़ी कर रहे हैं। इन मामलों को देखते हुए गणनाकर्मियों के लिए क्यूआर कोड वाला नियुक्ति पत्र और पहचान-पत्र जारी किया जा रहा है, जिसे स्कैन करके उनकी प्रामाणिकता सत्यापित की जा सकेगी।

    जनगणना के अंतर्गत दिल्ली नगर निगम के 250 वार्डों में इन दिनों मकान सूचीकरण के लिए स्व-गणना की प्रक्रिया चल रही है। 1 मई से 15 मई तक चलने वाले स्व-गणना अभियान में लोग स्वयं अपनी जानकारी आनलाइन भर सकते हैं। 16 मई से सरकारी गणनाकर्ता लोगों के घरों में जाकर सत्यापन करेंगे।

    एनडीएमसी और दिल्ली छावनी क्षेत्र में 1 अप्रैल से आनलाइन विवरण भरने की प्रक्रिया शुरू हुई थी अब सत्यापन का काम चल रहा है। गणनाकर्ता की आड़ में कोई अपराधी घर न पहुंच जाए, इसलिए लोगों को सतर्क रहना होगा। क्यूआर कोड आधारित पहचान-पत्र को स्कैन करके गणनाकर्ता की प्रामाणिकता अवश्य सत्यापित करनी चाहिए।

    जनगणना पत्र में पूछे गए प्रश्नों के अलावा कोई भी व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि फोन काल या मैसेज पर कोई जवाब नहीं देना है और न ही किसी लिंक पर क्लिक करना है।

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    वहीं, ऑनलाइन स्व-गणना में लोगों को https://se.census.gov.in पोर्टल पर अपने घर की पहचान करने में परेशानी हो रही है। पोर्टल पर खुलने वाले डिजिटल मानचित्र में लाल रंग के मार्कर को खींचकर आवास की पहचान की जाती है। कई लोगों की शिकायत है कि मानचित्र पर उनके भवन की पहचान नहीं हो पा रही है।

    अधिकारियों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति डिजिटल मानचित्र पर अपने घर की सही पहचान नहीं कर पाता है तो वह घर के निकटतम स्थान को टैग कर सकता है। घर-घर जाकर गणना करते समय गणनाकर्ता सभी से स्व-गणना आइडी मांगेगा और उसे अपने पास उपलब्ध टैग किए गए घरों से मिलाएगा। यदि मेल नहीं खाता है तो वह फिर से विवरण भरवाएगा। गणनाकर्ता 16 मई से घर-घर जाएंगे।

    स्व-गणना अभियान के अंतर्गत सोमवार शाम तक 93 हजार से अधिक परिवारों ने आनलाइन विवरण भर दिए हैं। उत्तर पूर्व, दक्षिण पश्चिम और उत्तर पश्चिम दिल्ली जिलों में सबसे अधिक परिवारों ने स्व-गणना पूरी कर ली है, जबकि पुरानी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली में यह संख्या तुलनात्मक रूप से कम है।

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