मां की बीमारी का बहाना बनाकर सजा निलंबन की मांग, दुष्कर्म के दोषी पर हाई कोर्ट ने लगाया जुर्माना
दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी की सजा निलंबन याचिका खारिज की। दोषी मां की बीमारी का बार-बार हवाला देकर अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी की सजा निलंबन याचिका खारिज की। फाइल फोटो
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। नाबालिग के दुष्कर्म करने जैसे संगीन अपराध में दोषी करार दिए गए व्यक्ति द्वारा बार-बार अपनी मां की बीमारी का हवाला देकर सजा निलंबन करने की मांग वाली याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने जुर्माना लगाकर खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा की पीठ ने कहा कि किसी तरह से मां की बीमारी का हवाला देकर निलंबन का एक अंतरिम आदेश प्राप्त करने के बाद उनकी सर्जरी न हो पाने के आधार पर बार-बार विस्तार की मांग करना दोषी अपीलकर्ता राजन की रणनीति का हिस्सा है।
पीठ ने कहा कि यह स्पष्ट है कि 2019 से ही अपीलकर्ता इसी आधार पर सजा निलंबन की मांग कर रहा है। अदालत ने कहा कि कई मौके पर अपने पक्ष में आदेश पारित कराने में याची सफल भी हुआ, लेकिन जब उसे राहत लगता कि अदालत से उसे राहत नहीं मिलेगी तो वह याचिका वापस ले लेता है।
हालांकि, कुछ दिनों के बाद वह नया आवेदन दाखिल कर सजा निलंबन की मांग करता था। इतना ही नहीं यह भी रिकार्ड पर आया है कि दोषी ने कभी भी अदालत द्वारा दिए गए समय पर आत्मसमर्पण भी नहीं किया। पीठ ने कहा कि यह और कुछ नहीं निश्चित तौर पर अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
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पीठ ने यह भी नाेट किया कि अपीलकर्ता दोषी ने सह-दोषियों के साथ मिलकर पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। पीठ ने कहा कि उक्त तथ्यों को देखते हुए अदालत को दोषी के साथ कोई सहानुभूति नहीं है और उसकी याचिका 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर खारिज की जाती है।
साथ ही अदालत ने दोषी अपीलकर्ता को निर्देश दिया कि उक्त धनराशि चार सप्ताह के अंदर दिल्ली हाई कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के पास जमा कराए।
अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया कि मां के पित्ताशय की सर्जरी के आधार पर दोषी ने वर्ष 2020 में जमानत ली थी। जेल अधीक्षक की तरफ से पेश गई स्थिति रिपोर्ट में कहा गया कि उसकी मां को सर्जरी टेस्ट के लिए जाना है, जोकि कभी नहीं हुआ। इतना ही नहीं जब उसकी मां अस्पताल में भर्ती हुई और डाक्टरों को पता चला कि उसका टेस्ट ही नहीं हुआ है तो उनकी भर्ती रद कर दी गई। अपीलकर्ता ने अपनी मां की देखभाल के लिए आठ सप्ताह के लिए सजा निलंबन की मांग की थी।