दिल्ली कांग्रेस में 14 साल बाद गठित हो रही प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर घमासान, मनमानी और अनदेखी का आरोप
दिल्ली कांग्रेस में 14 साल बाद गठित हो रही प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर घमासान मच गया है। पूर्व अध्यक्ष अनिल चौधरी ने मनमानी और विभिन्न वर्गों की अनदेखी ...और पढ़ें
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दिल्ली कांग्रेस में अधूरी कार्यकारिणी की गठन को लेकर घमासान।
HighLights
दिल्ली कांग्रेस में 14 साल बाद कार्यकारिणी गठन।
मनमानी चयन, विभिन्न वर्गों की अनदेखी का आरोप।
प्रदेश अध्यक्ष ने आरोपों को सिरे से नकारा।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। 14 साल के लंबे अंतराल के बाद दिल्ली कांग्रेस को प्रदेश कार्यकारिणी मिलने की प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने से पहले अधूरी कार्यकारिणी को लेकर भी पार्टी में घमासान मच गया है। कार्यकारिणी में शामिल किए जा रहे नेताओं के चयन को लेकर अंगुली उठ रही है तो विभिन्न वर्गों सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी का आरोप भी लग रहा है।
संगठन सृजन अभियान के तहत शुरू की गई इस प्रक्रिया के तहत अभी तक 31 सदस्यीय राजनीतिक मामलों की समिति गठित की गई है। इसके अलावा 12 उपाध्यक्ष और 26 महासचिव बनाए गए हैं।अगले कुछ दिनों में सचिव एवं जिलाध्यक्ष भी घोषित किए जाएंगे।
अनिल चौधरी ने उक्त नियुक्तियों को लेकर आपत्ति जताई
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने अभी तक हुई उक्त नियुक्तियों को लेकर आपत्ति जताई है। वह कहते हैं कि पार्टी की प्रदेश इकाई का पुनर्गठन पार्टी नेता राहुल गांधी के संगठन सृजन अभियान के तहत किया जा रहा है। लेकिन न तो समाज के विभिन्न वर्गों से संपर्क साधा गया है और न ही सुझाव लिए गए हैं। बंद कमरे में बैठकर मनमर्जी से सूची तैयार कर उस पर ऊपर से स्वीकृति ले ली गई।
बकौल चौधरी, अभी तक जारी सूचियों में सिख, जैन और ईसाई वर्ग का प्रतिनिधित्व नदारद है। कोरोनाकाल में मेहनत करने वाले नेताओं की भी अनदेखी की गई है। अनेक वरिष्ठ नेताओं का नाम कहीं नजर ही नहीं आ रहा। यही नहीं, पार्टी नेतृत्व द्वारा बनाए गए जिलाध्यक्षों को बचाने के लिए उन्हें एक साल के लिए सेवा विस्तार दिलवाने की कोशिश चल रही है। पूर्व जिलाध्यक्ष गुरचरण सिंह राजू सहित अनेक अन्य नेता भी ऐसा ही विरोध कर रहे हैं।
कार्यकारिणी में नए-पुराने नेता सम्मिलित किए जाएंगे
हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव का कहना है कि कार्यकारिणी गठन चल ही रहा है। अभी इसमें और भी बहुत से नए-पुराने नेता सम्मिलित किए जाएंगे। कुछ नेताओं ने स्वत: ही जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया है तो कुछ ने अपने प्रतिनिधि के तौर पर अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अनदेखी किसी की नहीं हुई लेकिन मौका उसी को दिया गया है जो सक्रिय हैं और काम कर रहे हैं। सिर्फ नाम के लिए किसी को पद नहीं दिया जाएगा।
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