'चूहों ने कुतरा कंप्यूटर का तार तो कर्मचारी की जेब होगी ढीली', राऊज एवेन्यू कोर्ट का आदेश
राउज एवेन्यू जिला अदालत ने आदेश दिया है कि चूहों, काकरोचों या पेय पदार्थों से कंप्यूटर खराब होने पर मरम्मत का खर्च संबंधित कर्मचारी को उठाना होगा। यह ...और पढ़ें

राऊज एवेन्यू कोर्ट का आदेश बना चर्चा का विषय।
HighLights
कंप्यूटर खराब होने पर कर्मचारी उठाएंगे मरम्मत का पूरा खर्च।
चूहे, काकरोच या पेय पदार्थों से हुए नुकसान पर नियम।
कार्यालयों में लापरवाही रोकने और स्वच्छता बनाए रखने का प्रयास।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित जिला अदालत में अब चूहों और काकरोचों की शरारत भी कर्मचारियों की जेब पर भारी पड़ सकती है। कोर्ट प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि कार्यालय में लापरवाही के कारण सरकारी कंप्यूटर या अन्य हार्डवेयर चूहों, काकरोचों या चाय-काफी जैसे पेय पदार्थ गिरने से खराब होता है, तो उसकी मरम्मत का खर्च संबंधित कर्मचारी को ही उठाना होगा।
कंप्यूटर शाखा के प्रभारी एवं विशेष न्यायाधीश अतुल कृष्ण अग्रवाल ने आदेश जारी कर कहा कि हाल के दिनों में कई कंप्यूटर ऐसी वजहों से खराब हुए, जिन्हें थोड़ी सावधानी से रोका जा सकता था। जांच में सामने आया कि कार्यालयों में छोड़ा गया खाने-पीने का कचरा चूहों और काकरोचों को आकर्षित कर रहा है।
चूहे कंप्यूटर के अंदर घुसकर तारों को पहुंचा रहे नुकसान
ये कंप्यूटर के अंदर घुसकर तारों और अन्य संवेदनशील पुर्जों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं, कई मामलों में चाय, कॉफी या पानी गिरने से भी सिस्टम खराब हुए। आदेश में कहा गया कि कोर्ट रूम, अहलमद कक्ष, पेंट्री और अन्य शाखाओं में रखे डस्टबिन में खाने का बचा सामान, रैपर, फायल पेपर या अन्य खाद्य सामग्री नहीं डाली जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये डस्टबिन केवल कार्यालयी कागजात के लिए हैं।
कोर्ट प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि चूहों, काकरोचों या पेय पदार्थों से होने वाला नुकसान निर्माता की वारंटी के दायरे में नहीं आता। ऐसे मामलों में मरम्मत का पूरा खर्च संबंधित कर्मचारी से वसूला जाएगा। साथ ही केयरटेकिंग शाखा को पूरे कोर्ट परिसर में नियमित पेस्ट कंट्रोल कराने और सभी न्यायिक अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है।
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इस आदेश ने कर्मचारियों के बीच बहस भी छेड़ दी
हालांकि, इस आदेश ने कर्मचारियों के बीच बहस भी छेड़ दी है। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि यदि चूहों और कॉकरोचों की समस्या है तो इसकी जिम्मेदारी केवल कर्मचारियों पर नहीं डाली जा सकती। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या यही नियम न्यायिक अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होगा।