दिल्ली में वकीलों की हड़ताल पर अदालतों का एक्शन, कोर्ट का समय बर्बाद करने पर ठोका जुर्माना; चेतावनी भी जारी
जिला अदालतों में वकीलों की हड़ताल के दौरान कई अदालतों ने स्थगन से इनकार करते हुए सख्त रुख अपनाया। न्यायिक समय बर्बाद करने पर पक्षकारों पर 2 हजार से 30 ...और पढ़ें

वकीलों की हड़ताल पर कोर्ट की सख्ती। फोटो: सांकेतिक
HighLights
हड़ताल के बावजूद अदालतों ने सख्त रुख अपनाया
न्यायिक समय बर्बाद करने पर 30 हजार तक जुर्माना
पटियाला हाउस कोर्ट ने एक पक्ष पर लगाया जुर्माना
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जिला अदालतों में सोमवार को वकीलों की हड़ताल के बीच कई अदालतों ने मामलों में स्थगन देने से इनकार करते हुए सख्त रुख अपनाया।
विभिन्न अदालतों ने गैरहाजिरी और कार्यवाही में देरी को लेकर पक्षकारों पर दो हजार रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया। अदालतों ने आदेशों में कहा कि हड़ताल के कारण न्यायिक समय की बर्बादी और असुविधा हुई है। ऐसे ही एक मामले पटियाला हाउस स्थित जिला सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने एक पक्ष पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
समयबद्ध सुनवाई के मामलों में नहीं आए वकील
अदालत ने कहा कि मामला समयबद्ध सुनवाई वाला है और दिल्ली हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद शुरू में प्रतिवादी की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। बाद में एक प्राॅक्सी वकील अदालत में उपस्थित हुआ, जब अदालत प्रतिकूल आदेश पारित करने वाली थी।
मामले में वादी पक्ष के वकील ने स्थगन की मांग का विरोध करते हुए कहा कि हाई कोर्ट के निर्देशों के बावजूद प्रतिवादी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ।
हालांकि अदालत ने प्रतिकूल आदेश पारित करने के बजाय मामले को 30 मई तक के लिए स्थगित कर दिया, लेकिन प्रतिवादी पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
बेवजह नहीं टाली जाएगी सुनवाई
यह राशि नई दिल्ली जिला के लाॅयर्स वेलफेयर फंड में जमा कराने का निर्देश दिया गया। अदालत ने साथ ही चेतावनी दी कि आगे किसी भी पक्ष को अनावश्यक स्थगन नहीं दिया जाएगा।
दरअसल, दिल्ली बार कोऑर्डिनेशन कमेटी के आह्वान पर जिला अदालतों में सोमवार को वकीलों ने हड़ताल की थी। यह हड़ताल 17 मई को दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विसेज एसोसिएशन के उस पत्र के बाद शुरू हुई।
जिसमें रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और एक न्यायाधीश के बीच हुई बहस का वीडियो गुप्त रूप से रिकाॅर्ड कर वायरल किए जाने की निंदा की गई थी। विवाद के बाद संबंधित न्यायाधीश को न्यायिक अकादमी से संबद्ध कर उन्हें पद से हटा दिया गया था।