दिल्ली दवा घोटाला: सप्लायर नेटवर्क से जुड़े अधिकारियों पर शिकंजा, बैंक खाते खंगाल रहीं जांच एजेंसियां
₹650 करोड़ के सीपीए दवा खरीद घोटाले की जांच अब सप्लायर नेटवर्क, वित्तीय पहलुओं और अधिकारियों व उनके स्वजनों की संपत्तियों तक पहुंच गई है। जांच एजेंसिय ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
₹650 करोड़ सीपीए दवा घोटाले की जांच का दायरा बढ़ा।
रंगीला ब्रदर्स, अधिकारियों के बैंक खातों, संपत्तियों की जांच।
सीपीए से 19 पैरामेडिकल कर्मचारियों का तबादला किया गया।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) के जरिए 650 करोड़ रुपये के दवा एवं उपकरण खरीद घोटाले की जांच अब सप्लायर नेटवर्क, उससे जुड़े वित्तीय पहलुओं और अधिकारियों व उनके स्वजनों से संबंधों तक पहुंच गई है।
जांच अब केवल खरीद प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पता लगाने पर केंद्रित है कि अनियमितताओं से लाभ किसे मिला और उससे अर्जित संपत्तियां कहां-कहां बनाई गईं।
एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीपीए से जुड़े कारोबारी राजीव अरोड़ा उर्फ राजीव रंगीला, संदीप अरोड़ा और राहुल अरोड़ा उर्फ रंगीला ब्रदर्स की भूमिका की जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि घोटाले की कई अहम कड़ियां सप्लायर नेटवर्क और खरीद प्रक्रिया से जुड़े लोगों के बीच संबंधों से जुड़ी हो सकती हैं।
नोटिस के बावजूद एजेंसियों के सामने नहीं आया राजीव
इसी कारण अब खरीद आदेशों, भुगतान रिकॉर्ड, कंपनियों की संरचना और उनसे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि पूछताछ के लिए नोटिस जारी होने के बावजूद राजीव रंगीला जांच एजेंसियों के समक्ष उपस्थित नहीं हुए, जबकि उनके एक भाई से पूछताछ की जा चुकी है।
चर्चा है कि राजीव रंगीला गिरफ्तारी से बचने के लिए देश से बाहर (जर्मनी) भाग गया है, हालांकि इसकी अधिकारिक पुष्टी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां इसका पता लगाने में जुटी हैं।
एसीबी और ईडी अब रंगीला ब्रदर्स, गिरफ्तार अधिकारियों और उनसे जुड़े अन्य लोगों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन तथा उनके द्वारा अर्जित चल और अचल संपत्तियों का ब्यौरा जुटा रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि हाल के वर्षों में किन-किन व्यक्तियों, कंपनियों या परिजनों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गईं और उनका वित्तीय स्रोत क्या था।
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जांच एजेंसियां दवा व उपकरण खरीद से संबंधित अधिकारियों, उनके स्वजनों और करीबी लोगों के नाम पर दर्ज संपत्तियों, कंपनियों में संभावित हिस्सेदारी और उनकी बैंक डिटेल की भी पड़ताल कर रही हैं।
उन कंपनियों की भी जांच हो रही जिन्हें दवाओं, सर्जिकल सामग्री और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति के बड़े आदेश मिले थे। कंपनी रिकार्ड, निदेशकों, साझेदारों और लाभार्थियों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि विभिन्न कंपनियों और निर्णय लेने वाले अधिकारियों के बीच कोई संबंध था या नहीं।
19 पैरामेडिकल कर्मचारियों का तबादला
दवा एवं उपकरण खरीद घोटाले की जांच के बीच सरकार ने सीपीए में प्रतिनियुक्ति पर तैनात 19 पैरामेडिकल कर्मचारियों का तबादला कर दिया है। इनमें फार्मासिस्ट, जूनियर मेडिकल लैब टेक्नीशियन, लैब अटेंडेंट और अन्य कर्मचारी शामिल हैं।
ये कर्मचारी लोकनायक, जीटीबी, डीडीयू समेत विभिन्न अस्पतालों से सीपीए में तैनात थे। खरीद, स्टाक और मांग पत्रों से जुड़े रिकार्ड की जांच के बीच यह प्रशासनिक कदम उठाया गया है। इससे पहले कई कर्मचारियों के निलंबन और एक कर्मचारी की सेवा समाप्ति की कार्रवाई भी हो चुकी है।