दिल्ली से कार चोरी कर नॉर्थ-ईस्ट में खपाता था गिरोह, पुलिस ने रिसीवर समेत दो को किया गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच ने महंगी गाड़ियां चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर रिसीवर समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली, राजस्थान व मणिपुर ...और पढ़ें

क्राइम ब्रांच ने महंगी गाड़ियां चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर रिसीवर समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
HighLights
क्राइम ब्रांच ने अंतरराज्यीय महंगी गाड़ी चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया।
रिसीवर समेत दो आरोपी गिरफ्तार, सात चोरी की गाड़ियां बरामद हुईं।
आरोपी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग कर गाड़ियों की चोरी करते थे।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। क्राइम ब्रांच ने महंगी गाड़ियां चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर रिसीवर समेत दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनकी निशानेदही पर दिल्ली, राजस्थान व मणिपुर से सात चोरी की महंगी गाड़ियां, चोरी की गाड़ियों की चार असली रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट, अलग-अलग कार माडल की पांच स्मार्ट चाबियां बरामद हुई हैं।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान रोहिणी के अमित नागर उर्फ सोनू और इंफाल के चोरी की गाड़ियों के रिसीवर तोइजम नटराज सिंह के रूप में हुई है। आरोपित गाड़ियों के सिक्योरिटी सिस्टम को बायपास करने और डुप्लीकेट चाबियां प्रोग्राम करने के लिए एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल करते थे।
चोरी की गाड़ियों को स्थानीय खरीदारों के नेटवर्क के जरिए पूर्वोत्तर राज्यों में भेजा जा रहा था। पुलिस इनसे पूछताछ कर फरार साथी अशरफ समेत अन्य आरोपितों को गिरफ्तार करने और चोरी में इस्तेमाल हुए इलेक्ट्रानिक डिवाइस का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है।
क्राइम ब्रांच के उपायुक्त चंद्र कुमार सिंह के मुताबिक, दिल्ली समेत एनसीआर में महंगी गाड़ियां चोरी करने वाले संगठित गिरोहों का पकड़ने के लिए एसीपी गिरीश कौशिक की देखरेख में और इंस्पेक्टर नीरज कुमार शर्मा के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी। जांच के दौरान चार जुलाई को सब इंस्पेक्टर रवि राणा को एक संदिग्ध वाहन चोर की गतिविधि के बारे में गुप्त जानकारी मिली।
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टीम ने महादेव चौक रेड लाइट के पास जाल बिछाते हुए एक काली महिंद्रा थार को रोका और चालक अमित नागर को पकड़ लिया। गाड़ी की तलाशी के दौरान, डैशबोर्ड से पांच स्मार्ट कार की चाभी (दो हुंडई की, दो किआ की और एक टोयोटा गाड़ी की) मिलीं। इसके अलावा डिग्गी से चार असली रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेटें मिलीं, जो अलग-अलग थानों में दर्ज वाहन चोरी से संबंधित थीं।
पूछताछ में उसने एक संगठित अंतरराज्यीय वाहन चोरी गिरोह के बारे में बताया जो महंगी गाड़ियां चुराने और उन्हें ठिकाने लगाने का काम करता था। इसकी निशानदेही पर राजस्थान और दिल्ली से एक टोयोटा इनोवा, एक किआ सेल्टोस और एक हुंडई आइ20 कार बरामद हुईं।
आरोपित ने आगे बताया कि चोरी की गाड़ियां उसके साथियों मणिपुर के नटराज और आतम के जरिये मणिपुर और दूसरे उत्तर-पूर्वी राज्यों में भेजी जा रही थीं। हालांकि नटराज को 15 जुलाई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने चोरी की टोयोटा फार्च्यूनर के साथ गिरफ्तार कर लिया था और उसकी निशानदेही पर इंफाल से चार महंगी गाड़ियां बरामद हुई थीं।
ऐसे चोरी करते थे महंगी गाड़ियां
गाड़ी चुराने से पहले, सायरन का तार काट दिया जाता था और ड्राइवर की तरफ की खिड़की का शीशा तोड़ दिया जाता था। इसके बाद, गाड़ी के ईसीएम (इंजन कंट्रोल माड्यूल) को एक्सेस करने, गाड़ी स्टार्ट करने और डुप्लीकेट स्मार्ट की प्रोग्राम करने के लिए एक खास इलेक्ट्रानिक टैबलेट का इस्तेमाल किया जाता था। जब भी डिमांड पर किसी खास माडल की गाड़ी को टारगेट किया जाता था, तो गिरोह पहले से ही उससे मेल खाता खिड़की का शीशा साथ ले जाता था ताकि अंदर घुसने के बाद टूटे हुए शीशे को बदला जा सके।
यह गिरोह मुख्य रूप से द्वारका, रोहिणी और दूसरे रिहायशी इलाकों में खड़ी महंगी गाड़ियों को निशाना बनाता था। चोरी की गाड़ियां मणिपुर में ठिकाने लगाने के लिए तोइजम नटराज सिंह को बेची जाती थीं, जबकि कुछ गाड़ियां राजस्थान में खरीदारों के जरिये बेची जाती थीं। डिलीवरी से पहले, असली रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट बदल दी जाती थीं और गाड़ियां दिल्ली में अलीपुर फ्लाईओवर के पास सौंप दी जाती थीं। आरोपितों को हर चोरी की गाड़ी के लिए लगभग 70 हजार से 80 हजार मिलते थे।