दिल्ली में साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश, रिमोट एक्सेस से बैंक खाते खाली करने वाले दो गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए मास्टरमाइंड समेत दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है। ये अपराधी नकली APK फाइल के जरिए लो ...और पढ़ें
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रिमोट एक्सेस से बैंक खाते खाली करने वाले दो गिरफ्तार।
HighLights
साइबर धोखाधड़ी गिरोह का दिल्ली पुलिस ने किया भंडाफोड़।
नकली APK से फोन का रिमोट एक्सेस लेकर ठगी करते थे।
मास्टरमाइंड समेत दो जालसाज गिरफ्तार, लाखों की ठगी उजागर।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मध्य जिला के साइबर सेल थाना पुलिस ने एक साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश कर मास्टरमाइंड समेत दो जालसाज को गिरफ्तार कर लिया है। मास्टरमाइंड के यूपी के देवरिया से गिरफ्तार किया गया है।
यह गिरोह सुरक्षा सिस्टम की पकड़ में न आने वाले नकली एपीके फाइल के जरिए लोगों के फोन का रिमोट एक्सेस लेकर उनके बैंक खाता खाली कर देता था। पुलिस ने जालसाजों के पास से इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, डेबिट कार्ड और एक क्रिप्टो हार्डवेयर वालेट भी बरामद किया है।
डीसीपी रोहित राजबीर सिंह के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों के नाम अभय साहनी (देवरिया, यूपी) व उमेश कुमार रजक (गोरखपुर) है। अभय साहनी इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड है। वह टेलीग्राम के जरिए एप बनाकर उनमें बदलाव कर साइबर अपराधियों को बेच देता था।
बिजली बिल कटने के नाम पर उसने 1,20,999 की ठगी की
उमेश कुमार रजक, अभय से एप खरीदकर लोगों से ठगी करता था। एक पीड़ित से बिजली बिल कटने के नाम पर उसने 1,20,999 की ठगी की थी। इनके कब्जे से 11 महंगे मोबाइल फोन, 11 डेबिट कार्ड और एक क्रिप्टो हार्डवेयर वालेट बरामद किए गए हैं।
मास्टरमाइंड आठवीं पास है, उसने यूट्यूब और टेलीग्राम से हैकिंग और साइबर धोखाधड़ी की तकनीक सीखी। बीते जुलाई में साइबर थाने में एक पीड़ित ने 1,20,999 आनलाइन ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़ित को एक अज्ञात नंबर से फोन आया और डराया गया कि अगर तुरंत भुगतान नहीं किया गया, तो उनका बिजली का मीटर काट दिया जाएगा।
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जालसाज को पीड़ित के फोन का पूरा रिमोट एक्सेस मिल गया
मदद के बहाने जालसाज ने पीड़ित के वाट्सएप पर कस्टमर केयर सपोर्ट एपीके नाम का खतरनाक एप भेजकर उसे इंस्टाल करवा दिया। एप डाउनलोड होते ही जालसाज को पीड़ित के फोन का पूरा रिमोट एक्सेस मिल गया, जिसके बाद उसने डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए पैसे उड़ा लिए।
शिकायत मिलने पर एसीपी पदम सिंह राणा और साइबर सेल के एसएचओ इंस्पेक्टर योगराज दलाल की टीम ने तकनीकी जांच के बाद पहले उमेश कुमार रजक को गिरफ्तार कर लिया। उमेश से पूछताछ और टेलीग्राम चैट की जांच में दो टेलीग्राम आइडी मिलीं, जहां से यह एप खरीदा जा रहा था।
डिजिटल सबूतों के आधार पर मुख्य एडमिन और एप डेवलपर अभय साहनी को देवरिया से गिरफ्तार कर लिया गया। अभय ने एपीके फाइलें बनाने, एंटी-वायरस डिटेक्शन को बायपास करने और फोन हैक करने की ट्रेनिंग यूट्यूब वीडियो, टेलीग्राम ग्रुप्स और इंटरनेट मीडिया से ली थी।
मोबाइल का एंटी-वायरस या सिक्योरिटी सिस्टम भी नहीं पकड़ पाता
वह टेलीग्राम पर आइडी चलाकर देशभर के साइबर ठगों को चार हजार में यह एप बेचता था और उन्हें टेक्निकल सपोर्ट भी देता था। इसके बनाए एप इस तरह के होते थे, जिन्हें मोबाइल का एंटी-वायरस या सिक्योरिटी सिस्टम भी नहीं पकड़ पाता था। उसने कुबूल किया कि वह अब तक 40 से 50 एपीके बेच चुका है और खुद भी करीब 20-25 लोगों से ठगी कर चुका है।
इनके कब्जे से 11 स्मार्टफोन (पांच आइफोन, तीन गूगल पिक्सल और तीन अन्य एंड्राइड फोन), 11 डेबिट कार्ड (नौ जियो पेमेंट्स बैंक और दो एनएसडीएल पेमेंट्स बैंक के कार्ड), एक क्रिप्टो हार्डवेयर वालेट, जिसका इस्तेमाल अमूमन क्रिप्टो करेंसी छुपाने के लिए किया जाता था, आठ सिमकार्ड, एक कार बरामद की गई है।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि मास्टरमाइंड के तार देश के और किन-किन राज्यों के साइबर अपराधियों से जुड़े हैं और इसने क्रिप्टो वालेट में कितना पैसा छिपा रखा है।
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