दिल्ली में मधुमेह बना जानलेवा संकट, बच्चों से बुजुर्गों तक में बढ़ रहा खतरा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मधुमेह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन गया है। 2024 में मधुमेह से होने वाली मौतों में 35% की वृद्धि हुई, जो 2023 के ...और पढ़ें

दिल्ली में मधुमेह अब एक गंभीर और तेजी से बढ़ता सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है।
HighLights
2024 में मधुमेह से मौतों में 35% की वृद्धि।
14 वर्ष से कम आयु वर्ग में अधिक मौतें दर्ज।
जीवनशैली में बदलाव मुख्य कारण, बढ़ा खतरा।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मधुमेह अब एक गंभीर और तेजी से बढ़ता सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। दिल्ली सरकार की ‘मृत्यु के कारण का चिकित्सा प्रमाणन’ (एमसीसीडी) रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में मधुमेह से मौत के मामलों में करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 14 वर्ष या उससे कम आयु वर्ग में दर्ज मौतों की संख्या 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग से अधिक पाई गई । 2024 में मधुमेह के कारण 2,459 लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 1,823 थी।
दिल्ली सरकार के आंकड़े बताते हैं कि अस्पतालों में मधुमेह से जुड़ी मौतों में भी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2024 में अस्पतालों में मधुमेह से संबंधित 1,703 मौतें हुईं, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 1,159 था। यानी एक ही साल में 544 अधिक मौतें हुई।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2005 से 2024 के बीच दिल्ली में मधुमेह के कारण कुल 42,716 मौत हुई। इनमें 33,640 पुरुष और 19,076 महिलाएं शामिल थीं। आयु वर्ग के हिसाब से सबसे अधिक मौतें 45 से 64 वर्ष के लोगों में हुईं, जिनकी संख्या 17,114 रही, जो कुल मौतों का 40.06 प्रतिशत है। इसके बाद 65 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में 15,313 मौतें दर्ज की गईं।
विशेषज्ञों के अनुसार इसका प्रमुख कारण जीवनशैली में आए बदलाव शारीरिक निष्क्रियता, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, अनियमित नींद और फास्ट फूड मधुमेह को कम उम्र में ही घातक बना रहे हैं।
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