दिल्ली में हर तीसरा वोटर ड्राफ्ट सूची से बाहर, SIR के बाद कटे रिकॉर्ड 33% वोट
दिल्ली की नई ड्राफ्ट मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद 47.56 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए ...और पढ़ें

दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद 47.56 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। (एआई एडिटेड इमेज)
HighLights
ड्राफ्ट सूची से 47.56 लाख मतदाताओं के नाम बाहर।
SIR के बाद दिल्ली में 33% वोटरों के नाम कटे।
मतदाता 30 सितंबर तक नाम शामिल कराने का दावा करें।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी की नई ड्राफ्ट मतदाता सूची ने दिल्ली की चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव कर दिया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी इस सूची में 1,45,10,299 करोड़ मतदाताओं में से 47,56,722 के नाम नहीं हैं। यानी करीब हर तीन में से एक मतदाता फिलहाल ड्राफ्ट सूची से बाहर है।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, एसआईआर वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली में ड्राफ्ट स्तर पर 33 प्रतिशत की कटौती सबसे ज्यादा है।
ड्राफ्ट सूची में अब दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों के 97,53,577 मतदाताओं के नाम हैं। घर- घर जाकर सत्यापन के दौरान कुल मतदाताओं में से 67.18 प्रतिशत के गणना फार्म मिले और उन्हें डिजिटल किया गया। बाकी करीब 47.5 लाख मतदाताओं के फार्म नहीं मिले। इन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, दोहरे नाम और अन्य (एएसडीडीओ) श्रेणियों में रखा गया है और इनके नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए।
कर्नाटक में संख्या ज्यादा, लेकिन दिल्ली में प्रतिशत सबसे अधिक
दिल्ली में 47.56 लाख नाम बाहर हुए हैं, जो संख्या के लिहाज से भी बहुत बड़ा आंकड़ा है। कर्नाटक में 4.46 करोड़ मतदाताओं में से करीब 1.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए थे जबकि आंध्र प्रदेश में यह संख्या करीब 44.89 लाख रही। लेकिन प्रतिशत के लिहाज से दिल्ली सबसे आगे है। दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव में लगभग 29.64 प्रतिशत नाम बाहर हुए।
चुनाव अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में आने-जाने वाली आबादी बड़ी संख्या में है। लोग नौकरी, कारोबार या अन्य कारणों से एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते हैं। इसी वजह से बड़ी संख्या में मतदाताओं के अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए जाने की संभावना है।
रोहिणी में सबसे ज्यादा सत्यापन, तुगलकाबाद में सबसे कम
एसआईआर के दौरान मतदाता फार्म के सत्यापन व डिजिटलीकरण की दर सभी विधानसभा क्षेत्रों में एक जैसी नहीं रही। रोहिणी में सबसे ज्यादा 83.43 प्रतिशत फार्म डिजिटल हुए, जबकि तुगलकाबाद में यह दर केवल 52.15 प्रतिशत रही। यानी दोनों क्षेत्रों के बीच सत्यापन की प्रक्रिया में बड़ा अंतर रहा।
दिल्ली में घर-घर जाकर एसआईआर की प्रक्रिया 30 जून से शुरू होकर 17 अगस्त तक चली। बूथ स्तर के अधिकारियों ने मतदाताओं तक पहुंचकर गणना फार्म उपलब्ध कराए और प्राप्त फार्म को डिजिटल किया। जिन मतदाताओं के फॉर्म इस प्रक्रिया में नहीं मिल सके, उनके नाम फिलहाल ड्राफ्ट सूची में नहीं आए हैं।
नाम छूटा है तो अभी मौका बाकी
ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता का नाम हमेशा के लिए कट गया है। ऐसे मतदाताओं को सूची में नाम शामिल कराने के लिए 31 अगस्त से 30 सितंबर तक दावा दाखिल करने का मौका दिया गया है। इसके लिए फार्म- छह और जरूरी दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं। दावों और आपत्तियों की जांच के बाद नोटिस और निस्तारण की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। इसके बाद चार नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जानी है।
इस तरह दिल्ली की मौजूदा ड्राफ्ट सूची में भले ही करीब 97.54 लाख मतदाताओं के नाम रह गए हों, लेकिन अगले दो महीनों में दावों और आपत्तियों के बाद यह आंकड़ा बदल सकता है। इसलिए 47.56 लाख नामों का बाहर होना अंतिम कटौती नहीं माना जाएगा।
