दिल्ली में ई-रिक्शा का कहर, सड़क हादसों में आई तेजी; लापरवाही से बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा
राजधानी दिल्ली में ई-रिक्शा से होने वाले सड़क हादसों में तेजी से वृद्धि हुई है। पिछले पांच वर्षों में मौतों का आंकड़ा लगभग तीन गुना बढ़कर 2025 तक 36 ह ...और पढ़ें

ई-रिक्शा एक नई चुनौती बनकर उभरे हैं।
HighLights
दिल्ली में ई-रिक्शा हादसों में मौतों का आंकड़ा बढ़ा।
अनियंत्रित ड्राइविंग, नाबालिग चालक मुख्य कारण हैं।
कमजोर नियमन से सड़कों पर खतरा बढ़ रहा है।
मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। राजधानी में सड़क हादसों का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। पहले जहां भारी वाहन और तेज रफ्तार कारें दुर्घटनाओं की मुख्य वजह थीं, अब ई-रिक्शा एक नई चुनौती बनकर उभरे हैं। इन्हें नियंत्रित करने की चर्चाओं के बीच अनियंत्रित ड्राइविंग, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के कारण इनके हादसे बढ़ रहे हैं।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में ई-रिक्शा से जुड़े दुर्घटनाओं में करीब तीन गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2021 में जहां ई-रिक्शा चालकों की लापरवाही से 10 लाेगों की सड़क हादसे में मौत हुई थी, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 36 पहुंच गई। सड़क हादसों में लोगों की मौत का बढ़ता ग्राफ इस ओर संकेत कर रहा है कि बिना पर्याप्त नियंत्रण और स्पष्ट नियमों के ई-रिक्शा तेजी से सड़कों पर फैलते जा रहे हैं।
हादसों की सबसे बड़ी वजह ड्राइवर का व्यवहार
यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, हादसों की सबसे बड़ी वजह वाहन का आकार नहीं, बल्कि चालक का व्यवहार है। ई-रिक्शा चालक अक्सर गलत दिशा में वाहन चलाना, बिना संकेत अचानक मोड़ लेना, ओवरलोडिंग करना और ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी जैसी लापरवाहियां करते हैं। इन कारणों से न केवल अन्य वाहन चालक बल्कि पैदल यात्री भी खतरे में आ जाते हैं।
कई मामलों में यह भी देखा गया है कि चालक बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण या वैध लाइसेंस के ही सड़कों पर उतर जाते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है। ई-रिक्शा सेक्टर में कमजोर नियमन भी इस समस्या की जड़ है। इनकी संख्या पर कोई ठोस नियंत्रण नहीं है, जिसके चलते जहां-तहां इनकी भरमार देखने को मिलती है।
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ब्लैक स्पॉट के रूप में उभर रहे ई-रिक्शा
राजधानी के कई इलाकों में ई-रिक्शा ब्लैक स्पाट के रूप में उभरते जा रहे हैं। इनमें उत्तम नगर, निर्माण विहार, शाहदरा, भजनपुरा, मंडोली चुंगी, कालकाजी, गोविंदपुरी, सीलमपुर रेड लाइट, झिलमिल, सागरपुर, जनकपुरी वेस्ट, नवादा, द्वारका के विभिन्न सेक्टर, छतरपुर, बदरपुर, सरिता विहार, जामिया नगर, ओखला, कालिंदी कुंज, करावल नगर, दरियागंज, मौजपुर, दिलशाद गार्डन, नांगलोई, पीरागढ़ी, पश्चिम विहार, रोहिणी, बवाना, पीतमपुरा, कोहाट एन्क्लेव, बुराड़ी, आजादपुर, जहांगीरपुरी, इंदरलोक, कश्मीरी गेट, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, आरके आश्रम मार्ग, झंडेवालान, करोल बाग, पटेल नगर, राजेंद्र नगर, लक्ष्मी नगर, कड़कडड़ूमा, आनंद विहार, पंजाबी बाग, नजफगढ़, डाबड़ी मोड़, पालम, राजौरी गार्डन, साकेत, मालवीय नगर, कुतुब मीनार, महरौली, दिल्ली विश्वविद्यालय और माडल टाउन जैसे इलाके शामिल हैं।
इन स्थानों पर मेट्रो स्टेशनों के बाहर ई-रिक्शा की लंबी कतारें और अव्यवस्थित संचालन आम दृश्य बन चुका है, जिससे ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
धड़ल्ले से नाबालिग दौड़ा रहे ई-रिक्शा
दिल्ली की सड़कों पर नाबालिग धड़ल्ले से ई-रिक्शा दौड़ाते देखे जा सकते हैं। इसके अलावा अधिक सवारी भरने की प्रवृत्ति भी आम है, जहां क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर तेज रफ्तार में वाहन चलाया जाता है। कई बार आठ से दस यात्रियों को एक ही ई-रिक्शा में बैठा लिया जाता है, जिससे वाहन का संतुलन बिगड़ जाता है और दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। ई-रिक्शा से जुड़े हादसों में सबसे अधिक खतरा पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और दोपहिया वाहन चालकों को होता है।
दो लाख से अधिक पंजीकृत ई-रिक्शा
वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में दो लाख से अधिक पंजीकृत ई-रिक्शा हैं, जबकि बड़ी संख्या में बिना पंजीकरण वाले वाहन भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं। रोहिणी में सबसे अधिक 46,150 ई-रिक्शा दर्ज किए गए हैं, इसके बाद वजीरपुर में 30,252 और लोनी रोड क्षेत्र में 28,858 ई-रिक्शा हैं। इसके विपरीत, वसंत विहार जैसे पाश इलाकों में इनकी संख्या बेहद कम है।
ई-रिक्शा की चपेट में आने से लोगों की मौत
| वर्ष | मौत |
|---|---|
| 2021 | 10 |
| 2022 | 8 |
| 2023 | 18 |
| 2024 | 20 |
| 2025 | 36 |
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