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    दिल्ली फायर सर्विस में अपार चुनौतियां; 57 साल पुराना कम्युनिकेशन सिस्टम, खाली पद व 17 स्टेशनों पर 71 का बोझ

    Updated: Mon, 08 Jun 2026 09:52 AM (IST)

    दिल्ली फायर सर्विस 57 साल पुराने संचार ढांचे और बड़ी संख्या में खाली पदों जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, जिससे आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रभावि ...और पढ़ें

    राजधानी में आग जैसी आपात स्थितियों से निपटने वाली प्रमुख एजेंसी आज भी 57 वर्ष पुराने संचार ढांचे के सहारे काम कर रही है। फाइल फोटो

    राजधानी में आग जैसी आपात स्थितियों से निपटने वाली प्रमुख एजेंसी आज भी 57 वर्ष पुराने संचार ढांचे के सहारे काम कर रही है। फाइल फोटो

    HighLights

    1. फायर सर्विस 57 साल पुराने संचार ढांचे पर निर्भर।

    2. 853 फायर फाइटर और 72 स्टेशन अधिकारी पद रिक्त।

    3. आधुनिकीकरण के लिए जीपीएस, जीआईएस तकनीक लागू होगी।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हौजरानी अग्निकांड के बाद दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस) की कार्यप्रणाली और संसाधनों की व्यापक समीक्षा में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। राजधानी में आग जैसी आपात स्थितियों से निपटने वाली प्रमुख एजेंसी आज भी 57 वर्ष पुराने संचार ढांचे के सहारे काम कर रही है। ऐसे समय में जब दिल्ली का भौगोलिक विस्तार, आबादी और बहुमंजिला इमारतों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है, फायर सर्विस का मूल वायरलेस नेटवर्क लगभग उसी स्वरूप में बना हुआ है।

    प्रणाली में नहीं आया कोई बदलाव

    दिल्ली के गृह मंत्री अशिष सूद की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में फायर सर्विस की तैयारियों और संचार नेटवर्क की प्रभावशीलता का आकलन किया गया। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि डीएफएस का वायरलेस नेटवर्क 1969 में केवल 17 फायर स्टेशनों के लिए दो वीएचएफ (वेरी हाई फ्रीक्वेंसी) चैनलों-148.525 मेगाहर्ट्ज और 148.725 मेगाहर्ट्ज-पर शुरू किया गया था। वर्तमान में दिल्ली में 71 फायर स्टेशन संचालित हैं, लेकिन संचार प्रणाली में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।

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    कैसे पूरी होगी दिल्ली की जरूरत

    हालांकि, समय के साथ वायरलेस उपकरणों को आधुनिक बनाया गया और वर्तमान में डिजिटल मोबाइल रेडियो सेटों का उपयोग हो रहा है, लेकिन संचार प्रणाली की बुनियादी संरचना अब भी पुरानी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा नेटवर्क तेजी से विकसित हुई दिल्ली की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है।

    रिक्त पद भी बड़ी चुनौती

    दिल्ली फायर सर्विस के सूत्रों के अनुसार, विभाग में स्वीकृत पदों के मुकाबले एक चौथाई से अधिक फायर फाइटर पद खाली पड़े हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 3,312 स्वीकृत पदों में से 853 फायर फाइटरों के पद रिक्त हैं। इसके अलावा स्टेशन अधिकारी के 90 स्वीकृत पदों में से केवल 18 पदों पर ही नियुक्तियां हैं। सूत्रों का कहना है कि स्टेशन अधिकारी पद के लिए अंतिम प्रत्यक्ष भर्ती वर्ष 2011 में हुई थी।

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    इमारतों में उलझ रहे सिग्नल

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    समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि वीएचएफ आधारित संचार व्यवस्था ‘लाइन ऑफ साइट’ तकनीक पर निर्भर करती है। इसका अर्थ है कि रेडियो संकेतों के सुचारु आदान-प्रदान के लिए दोनों बिंदुओं के बीच स्पष्ट मार्ग होना जरूरी है।

    दिल्ली जैसे घने शहरी क्षेत्र में ऊंची इमारतें, भूमिगत पार्किंग और बेसमेंट जैसी संरचनाएं संकेतों को बाधित करती हैं, जिससे नियंत्रण कक्ष और घटनास्थल के बीच संचार प्रभावित हो सकता है।

    अधिकारियों के अनुसार, आपदा की स्थिति में संचार में आने वाली यह बाधा राहत एवं बचाव कार्यों की गति को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में बढ़ती अग्नि दुर्घटनाओं और जनहानि को देखते हुए संचार व्यवस्था को आधुनिक बनाने की आवश्यकता महसूस की गई है।

    फायर सर्विस की बढ़ाएंगे क्षमता

    दिल्ली फायर सर्विस के आंकड़े बताते हैं कि आग की घटनाओं में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग जान गंवा रहे हैं। वर्ष 2019-20 में 100 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2025-26 में भी 84 लोगों की जान आग की घटनाओं में गई। यह स्थिति फायर सर्विस की क्षमता बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित करती है।

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    दिल्ली के गृह मंत्री अशिष सूद ने कहा कि फायर सर्विस के व्यापक आधुनिकीकरण की दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं और नई तकनीक को जल्द लागू किया जाएगा। उनका कहना है कि दिल्ली का विस्तार लगातार हुआ, लेकिन फायर विभाग का तकनीकी विकास उसी अनुपात में नहीं हो पाया।

    नई व्यवस्था में क्या होगा सुधार?

    नई प्रणाली के तहत जीपीएस, जीआईएस और निगरानी कैमरों को एकीकृत किया जाएगा। इससे फायर टेंडरों की रीयल टाइम लोकेशन पर नजर रखी जा सकेगी और किसी भी घटना की सूचना मिलते ही निकटतम वाहन को स्वतः रवाना किया जा सकेगा। साथ ही ट्रैफिक की स्थिति का विश्लेषण कर सबसे तेज मार्ग भी तय किया जाएगा।

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    अधिकारियों का दावा है कि उन्नत संचार नेटवर्क बहुमंजिला इमारतों, बेसमेंट और अन्य जटिल संरचनाओं में भी प्रभावी ढंग से कार्य करेगा। बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी संचार व्यवस्था चालू रहेगी, जिससे आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

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