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    दिल्ली में बसेगी नमो सिटी, 3 धांसू लोकेशन शॉर्टलिस्ट; शहरवासियों के लिए क्या बदलेगा?

    Updated: Tue, 16 Jun 2026 07:47 PM (GMT+05:30)

    दिल्ली सरकार नमो सिटी के लिए तीन संभावित स्थानों का प्रस्ताव एनसीआर प्लानिंग बोर्ड और केंद्रीय मंत्रालय को भेजेगी। ...और पढ़ें

    दिल्ली सरकार नमो सिटी के लिए तीन संभावित स्थानों का प्रस्ताव एनसीआर प्लानिंग बोर्ड और केंद्रीय मंत्रालय को भेजेगी। जागरण

    दिल्ली सरकार नमो सिटी के लिए तीन संभावित स्थानों का प्रस्ताव एनसीआर प्लानिंग बोर्ड और केंद्रीय मंत्रालय को भेजेगी। जागरण

    HighLights

    1. नमो सिटी के लिए दिल्ली सरकार तीन प्रस्ताव भेजेगी।

    2. नरेला-बवाना, द्वारका फेज-2, अलीपुर-बुराड़ी संभावित स्थान।

    3. तकनीकी, भौगोलिक, कनेक्टिविटी पर होगा स्थानों का मूल्यांकन।

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। नमो सिटी के लिए दिल्ली सरकार एनसीआर प्लानिंग बोर्ड और केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय को तीन प्रस्ताव भेजेगी। प्रस्ताव में दिए गए विकल्पों का तकनीकी, भौगोलिक और कनेक्टिविटी के पैमाने पर मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद इन तीनों में से सर्वाधिक उपयुक्त एक लोकेशन का चयन करेगा, जहां इस नई सिटी को बसाया जाएगा।

    वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार दिल्ली में अंदरूनी इलाकों में इतनी बड़ी ग्रीनफील्ड टाउनशिप के लिए जगह ही नहीं बची है। ऐसे में लैंड पूलिंग पालिसी और दिल्ली के मास्टर प्लान-2041 के आधार पर ये तीन संभावित लोकेशन तय होंगी।

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    यह तीन लोकेशन बन सकती हैं प्रस्ताव का हिस्सा

    1. नरेला-बवाना और (उत्तर-पश्चिम दिल्ली) : खाली जमीन की उपलब्धता के मामले में यह सबसे मजबूत दावेदार है। यह इलाका नेशनल हाइवे-44 (जीटी करनाल रोड) और अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (यूईआर-2) से सीधा जुड़ा है। साथ ही भविष्य में प्रस्तावित रिठाला -नरेला मेट्रो कॉरिडोर (रेड लाइन विस्तार) एवं दिल्ली-पानीपत नमो भारत (आरआरटीएस) कारिडोर से इसकी कनेक्टिविटी लाजवाब होने वाली है।

    2. द्वारका फेज-2 और नजफगढ़ बार्डर (पश्चिमी दिल्ली) : इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आइजीआइ) एयरपोर्ट और द्वारका एक्सप्रेसवे के नजदीक होने के कारण यह बेहद हाई-प्रोफाइल बेल्ट है। यहां पर यशोभूमि और डिप्लोमैटिक एन्क्लेव जैसे वैश्विक प्रोजेक्ट्स पहले से ही आ चुके हैं, जिससे यह कारपोरेट और ''वाक-टू-वर्क'' कल्चर के लिए सबसे अनुकूल मानी जा रही है।

    3. अलीपुर-बुराड़ी बेल्ट या रोहिणी के नए सेक्टर : लैंड पूलिंग पालिसी के तहत जमीनों को इकट्ठा करने और बेहतरीन हाईवे कनेक्टिविटी के चलते इसे तीसरे विकल्प के रूप में रखा जा सकता है। पूर्वी पेरिफेरल और जीटी रोड के संगम पर होने के कारण यहां से यूपी और हरियाणा दोनों तरफ जाना आसान है।

    क्यों खास और बेहतर होगी यह 'नमो सिटी'?

    • इस नई सब-सिटी को परंपरागत कॉलोनियों से बिल्कुल अलग, भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर ''ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी'' की तर्ज पर बेहद सुनियोजित तरीके से बसाया जाएगा।
    • स्मार्ट नागरिक सुविधाएं : इसका पूरा ढांचा ग्लोबल स्मार्ट शहरों की तर्ज पर होगा, जहां भूमिगत यूटिलिटी लाइंस, स्मार्ट कचरा प्रबंधन और 24x7 बिजली-पानी की व्यवस्था होगी।
    • वॉक-टू-वर्क कंसेप्ट : शहर में कमर्शियल और रेजिडेंशियल एरिया का ऐसा बेहतरीन मिक्स होगा कि लोगों के दफ्तर व व्यावसायिक केंद्र उनके घरों के बेहद नजदीक हों, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव न रहे।
    • इको-फ्रेंडली और ग्रीन सिटी : शहर के एक बड़े हिस्से को ग्रीन बेल्ट के रूप में आरक्षित किया जाएगा और प्रदूषण मुक्त परिवहन के लिए केवल इलेक्ट्रिक वाहनों और साइकिल ट्रैक्स को प्राथमिकता दी जाएगी।
    • सुपरफास्ट कनेक्टिविटी : इसे मेट्रो- नमो भारत (आरआरटीएस) हाई-स्पीड सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों से सीधे जोड़ा जाएगा ताकि बाकी दिल्ली और एनसीआर के शहरों से आना-जाना बेहद आसान हो।

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