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कभी जिमखाना क्लब में भारतीयों की एंट्री थी लगभग बैन, नहीं मिलती थी सदस्यता

Updated: Sun, 24 May 2026 06:12 AM (IST)

दिल्ली जिमखाना क्लब, जिसकी स्थापना अंग्रेजों ने की थी, कभी भारतीयों के लिए प्रतिबंधित था और आज भी यह सत्ता व सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है। हाल ही मे ...और पढ़ें

लुटियंस दिल्ली स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब।

लुटियंस दिल्ली स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब।

HighLights

  1. अंग्रेजों द्वारा 1913 में स्थापित, भारतीयों की एंट्री प्रतिबंधित थी।

  2. सत्ता, सियासत और सामाजिक प्रतिष्ठा का जीवंत प्रतीक।

  3. सरकार ने क्लब को परिसर खाली करने का निर्देश दिया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। लुटियंस दिल्ली स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब सिर्फ एक स्पोर्ट्स क्लब नहीं, बल्कि दिल्ली की सत्ता, सियासत और सामाजिक प्रतिष्ठा का जीवंत इतिहास है। करीब एक सदी पहले अंग्रेजों द्वारा स्थापित यह क्लब आज भी राजधानी के सबसे प्रभावशाली ठिकानों में गिना जाता है। कहा जाता है कि दिल्ली में कई बड़े फैसले सिर्फ सरकारी दफ्तरों में नहीं, बल्कि जिमखाना क्लब के लान, बार और डाइनिंग टेबल पर भी आकार लेते रहे हैं।

1913 में जब अंग्रेज नई दिल्ली को अपनी नई राजधानी के रूप में विकसित कर रहे थे, तब इस क्लब की स्थापना इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब के नाम से हुई थी। उस दौर में यहां केवल ब्रिटिश अफसरों, सेना के अधिकारियों और अंग्रेज अभिजात वर्ग की पहुंच थी। भारतीयों की एंट्री लगभग नामुमकिन मानी जाती थी।

आजादी के बाद इम्पीरियल शब्द हटाया गया और क्लब का नाम दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया, लेकिन इसकी शाही पहचान बरकरार रही। इसे प्रसिद्ध ब्रिटिश आर्किटेक्ट राबर्ट टोर रसेल ने डिजाइन किया था, जिन्होंने कनाट प्लेस और तीन मूर्ति भवन जैसी ऐतिहासिक इमारतों की रूपरेखा भी तैयार की थी। यही वजह है कि जिमखाना क्लब को लुटियंस दिल्ली की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

क्लब से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां आज भी दिल्ली के पुराने हलकों में सुनाई देती हैं। कहा जाता है कि 1930 के दशक में वायसराय की पत्नी लेडी विलिंगडन को दिल्ली में बेहतर स्विमिंग पूल नहीं मिला तो उन्होंने खुद आर्थिक मदद देकर यहां स्विमिंग पूल बनवाया। बाद में इसे लेडी विलिंगडन स्विमिंग बाथ के नाम से जाना गया।

क्लब प्रभावशाली लोगों का पसंदीदा ठिकाना बन गया

आजादी के बाद यह क्लब भारतीय नौकरशाही, राजनीति, न्यायपालिका और कारोबारी जगत के प्रभावशाली लोगों का पसंदीदा ठिकाना बन गया। इसकी सदस्यता को आज भी दिल्ली का सबसे बड़ा स्टेटस सिंबल माना जाता है। चर्चा है कि यहां सदस्य बनने के लिए लोगों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।

हाल के वर्षों में क्लब विवादों में भी रहा है। जमीन, प्रशासनिक नियंत्रण और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कई बार सवाल उठे। इसके बावजूद दिल्ली जिमखाना क्लब की चमक कम नहीं हुई। पुराने पत्रकारों और अफसरों के बीच आज भी एक मशहूर लाइन कही जाती है दिल्ली की असली पावर सिर्फ नार्थ ब्लाक में नहीं, जिमखाना के लान में भी दिखती है।

सदस्यता के लिए थी लंबी कतार

इस क्लब की सदस्यता के लिए काफी लंबी कतार थी। बताया जाता है कि सदस्यता के लिए कई सालों का इंतजार करना पड़ता था। कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी को भी 2006 में इसकी सदस्यता मिली थी। एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत चहल भी इसके सदस्य हैं।

मीडिया कर्मियों को अंदर जाने से रोका

केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को पांच जून तक कैंपस खाली करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बारे में अभी भी कई जिमखाना क्लब के सदस्य को पता नहीं है। क्लब के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है और मीडिया कर्मियों को अंदर जाने से भी रोकने का आदेश दिया हुआ है। एक सदस्य ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि यह फैसला निराशाजनक है। सरकार को वैकल्पिक उपाय करना चाहिए। ताकि जो इसके सदस्य हैं उन्हें कोई अन्य ठिकाना मिल सके।

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