विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया पर रोक लगाना केंद्र का काम', दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी

Published: Thu, 20 Aug 2026 10:21 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल को विनियमित करना या उस पर रोक लगाना ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को इसे प्रतिवेदन के तौर पर विचार करने का निर्देश दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को इसे प्रतिवेदन के तौर पर विचार करने का निर्देश दिया।

HighLights

  1. बच्चों के इंटरनेट मीडिया उपयोग पर रोक केंद्र का काम।

  2. हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई से किया इनकार।

  3. केंद्र सरकार को प्रतिवेदन पर विचार करने का निर्देश।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने या उसे विनियमित करना केंद्र की नीति बनाने के दायरे में आता है।

न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव व न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने अधिकारियों से इस पहलू पर फैसला लेने को कहते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। साथ ही केंद्र सरकार को याचिका को प्रतिवेदन के ताैर पर लेकर इस पर विचार करने को कहा। इतना ही नहीं अदालत ने इसे लेकर समयसीमा तय करने से भी इनकार किया।

कानून या दिशानिर्देश बनाने पर विचार करने का निर्देश देने की मांग

याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार से 13 साल से कम उम्र के बच्चों द्वारा इंटरनेट मीडिया के इस्तेमाल को सीमित करने के लिए कानून या दिशानिर्देश बनाने पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की थी। साथ ही, 13-16 साल की उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया कंटेंट को विनियमित करने के लिए एक फ्रेमवर्क बनाने की भी मांग की गई थी।

केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुई अधिवक्ता निधि रमन ने कहा कि इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की मौजूदगी पर चिंता का विषय है। हालांकि, पीठ ने कहा कि प्रतिबंध लगाना सबसे बड़ी कार्रवाई है और इस बीच मध्यस्थों के खिलाफ कदम उठा रहे हैं।

यह भी पढ़ें- 'समलैंगिक जोड़ों की याचिका पर एक साल बाद भी क्यों नहीं दाखिल किया जवाब', हाई कोर्ट ने पूछा

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।