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    'साइबर फ्रॉड में अब ग्राहक की लापरवाही मानी जाएगी', RBI सर्कुलर का हवाला देते हुए हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

    Updated: Sun, 31 May 2026 09:23 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बैंक की चेतावनियों के बावजूद संदिग्ध लिंक पर क्लिक करके पैसे गंवाने वाले ग् ...और पढ़ें

    दिल्ली हाई कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी पर अहम फैसला सुनाया है।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी पर अहम फैसला सुनाया है।

    HighLights

    1. ग्राहक संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने पर स्वयं जिम्मेदार।

    2. बैंक की सुरक्षा चेतावनियों को नजरअंदाज करना लापरवाही।

    3. आरबीआई सर्कुलर के तहत ग्राहक की लापरवाही पर जिम्मेदारी।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। साइबर धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि बैंक द्वारा जारी की जाने वाली सुरक्षा चेतावनियों के बावजूद, धोखेबाजों द्वारा भेजे गए संदिग्ध लिंक दबाने के कारण पैसे गंवाने वाले ग्राहक इसके लिए स्वयं जिम्मेदार होते हैं।

    हाई कोर्ट ने निर्णय सुनाया है कि अगर कोई खाताधारक संदिग्ध लिंक न दबाने की बैंक की चेतावनियों पर नजरअंदाज करता है, तो उसे लापरवाह कहा जा सकता है। पीठ ने कहा कि डिजिटल बैंकिंग और साइबर धोखाधड़ी के संदर्भ में लापरवाही तब भी हो सकती है जब कोई ग्राहक, बार-बार दी गई सलाह और सुरक्षा चेतावनियों के बावजूद, संदिग्ध या अनजान लिंक पर जाता है। इससे उसके बैंकिंग विवरण की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।

    अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) द्वारा 2017 में बैंकों को जारी एक सर्कुलर को रिकार्ड पर लिया। इसके तहत अगर भुगतान के दौरान ग्राहक द्वारा विवरण साझा करने में लापरवाही बरती जाती है तो साइबर धोखाधड़ी से हुए नुकसान की जिम्मेदारी ग्राहक की होगी। ऐसे मामलों में, ग्राहक को बैंक को धोखाधड़ी की रिपोर्ट करने तक पूरा नुकसान खुद उठाना पड़ता है।

    अदालत ने उक्त टिप्पणी और आदेश स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआइ) की अपील याचिका पर दिया। एक शिक्षाविद ने अपने एसबीआइ के बचत खाते ने साइबर ठगी के कारण 2.60 लाख रुपये गंवा दिए थे। मैसेज के माध्यम से मिले लिंक पर क्लिक करने के कारण दो बार में उनके पैसे कट गए।

    एसबीआइ ने पैसे देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि लेन-देन वैध लागिन विवरण का इस्तेमाल करके किए गए थे और बैंक ने ओटीपी भी भेजे थे ताकि यह पता चल सके कि पैसे ट्रांसफर करने का अनुरोध किया जा रहा है। आरबीआइ ने एसबीआइ के रुख से आंशिक रूप से सहमति जताई, लेकिन ग्राहक को ठगी से गई धनराशि का एक-तिहाई हिस्सा देने को कहा।

    हालांकि, पूरी राशि वापस पाने के लिए ग्राहक ने हाई कोर्ट का रुख किया और एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। उक्त निर्णय को एसबीआइ ने चुनौती दी। एसबीआइ की अपील को स्वीकार करते हुए पीठ ने एकल पीठ के निर्णय को रद करते हुए माना कि ग्राहक यह साबित नहीं कर पाया कि बैंक ने आरबीआइ के नियामक सुरक्षा उपायों का पालन करने में कहां चूक की थी।