दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में करोड़ों के उपकरण बेकार, हाई कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में करोड़ों के उपकरण बेकार पड़े होने पर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव से इस मामले प ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में करोड़ों के उपकरण बेकार पड़े होने पर चिंता व्यक्त की है।
HighLights
हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में बेकार पड़े उपकरणों पर चिंता जताई।
दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
स्टाफ की कमी और बुनियादी ढांचे में सुधार पर जोर दिया।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये के उपकरणों के बेकार पड़े होने पर चिंता जताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह व न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने उक्त टिप्पणी एक रिपोर्ट देखते हुए की।
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली राज्य कैंसर इंस्टीट्यूट और जीटीबी जैसे अस्पतालों में दुनिया की नामी कंपनियों द्वारा बनाए गए कई जरूरी उपकरणों का इस्तेमाल नहीं हो रहा था। अदालत ने नोट किया कि सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक इस्तेमाल न होने के मुख्य कारण तकनीकि स्टाफ की कमी है।
इसके अलावा मुख्य उपकरणों भी नहीं है। पीठ ने निर्देश दिया कि एनआइसी को नेक्स्ट-जेन सिस्टम के कामकाज की स्थिति का पता लगाने के लिए औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। मामले पर अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।
सरकारी अस्पताल के बुनियादी ढ़ांचे को बेहतर करने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि कैंसर अस्पताल में 50-60 करोड़ रुपये के उपकरण बेकार पड़े हैं। पीठ ने कहा कि जीटीबी अस्पताल की स्थिति भी चौंकाने वाली है और यहां पर कोरोना महामारी के दौरान दान में मिले 400 वेंटिलेटर और 910 आक्सीजन कंसंट्रेटर बेकार पड़े हैं।
खबरें और भी
यहां तक कि ईसीजी मशीन भी काम नहीं कर रही है और रिपोर्ट में किसी दूसरी ईसीजी मशीन का जिक्र नहीं है। पीठ ने कहा कि बेकार पड़े उपकरणों की संख्या बहुत अधिक है और यह साफ नहीं है कि इतना बड़ा निवेश करने के बाद भी इन उपकरणों को बेकार क्यों पड़ा रहने दिया जा रहा है।
पीठ ने पूछा कि जरूरी स्टाफ की व्यवस्था करने के लिए अस्पताल या सर्विस डिपार्टमेंट ने क्या कदम उठाए हैं। इसके साथ ही पीठ ने स्वास्थ्य सचिव को अस्पतालों के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और सेक्रेटरी (सर्विसेज) के साथ इस मुद्दे पर बैठक करने और रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि अधिकारी हर अस्पताल की स्थिति का विश्लेषण करेंगे और स्टाफ उपलब्ध कराने, जरूरत पड़ने पर बेकार पड़े उपकरणों को दूसरी जगह भेजने, एक्सेसरीज और मुख्य उपकरण उपलब्ध कराने जैसे कदमों पर विचार करेंगे।
पीठ ने कहा कि इस संबंध में 17 अगस्त को सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर स्वास्थ्य सचिव के कार्यालय में बैठक होगी और इसमें सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं व ढ़ांचा के मामले का स्वत: संज्ञान लेकर अदालत ने 2017 में जनहित याचिका शुरू की थी।