सिर्फ संसद की सुरक्षा की चिंता ही क्यों? PIL पर भड़का दिल्ली HC; याचिका पर सवाल उठाते हुए लगाई फटकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने संसद की सुरक्षा की व्यापक समीक्षा की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि संसद की सुरक्षा का जिम्मा सरकार का है ...और पढ़ें

संसद की सुरक्षा की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने लगाई फटकार। फोटो: आर्काइव
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने संसद सुरक्षा याचिका खारिज की
अदालत ने न्यायिक दखल से इनकार किया
संसद की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। संसद की सुरक्षा की व्यापक समीक्षा की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि मामले में न्यायिक दखल देने का कोई कारण नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि अदालत यह निर्देश नहीं देगी कि संसद अपनी सुरक्षा का प्रबंधन कैसे करे।
अदालत ने यहां तक कहां कि हर काेई जनहित याचिका दायर कर रहा है और यह सिर्फ प्रचार के लिए किया जा रहा है।
अदालत ने याचिका पर उठाए सवाल
अदालत ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर यह किस तरह की याचिका है और क्या अदालत संसद की सुरक्षा की समीक्षा पर निर्देश दे सकती है।
अधिवक्ता राज सिंह ने याचिका दायर कर कहा था कि लोकतंत्र में संसद की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हर व्यक्ति की सुरक्षा महत्वपूर्ण है और अदालत को संसदीय लोकतंत्र पर लेक्चर की जरूरत नहीं है।
पीठ ने यह भी सवाल किया कि याचिकाकर्ता की चिंता सिर्फ संसद तक ही क्यों सीमित है और कहा कि रेलवे स्टेशनों पर भगदड़, हवाई अड्डों पर सुरक्षा में चूक और पैदल चलने वालों की सुरक्षा पर वैसा ध्यान नहीं दिया जाता।
सुरक्षा से जुड़े कई पहलुओं का था हवाला
याचिकाकर्ता ने याचिका में 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले और 2023 में लोकसभा की सुरक्षा में सेंध का जिक्र किया गया था।
साथ ही हाल में काकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान संसद की ओर बड़े पैमाने पर लोगों को जुटाने की हालिया कोशिशों का भी हवाला दिया गया।
याचिका में साइबर घुसपैठ से लेकर एआई आधारित गलत जानकारी और ड्रोन टेक्नोलाॅजी जैसे उभरते खतरों का भी याचिका में जिक्र किया। हालांकि, पीठ ने याचिका पर विचार करने से इन्कार करते हुए कहा कि संसद की सुरक्षा का जिम्मा सरकार का है।