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    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा-हाइपरटेंशन पर पेंशन से इनकार करना गलत, एयरफोर्स अधिकारी को दी राहत

    Updated: Thu, 22 Jan 2026 07:52 PM (IST)

    दिल्ली हाईकोर्ट ने एक एयरफोर्स अधिकारी को राहत देते हुए कहा कि केवल हाइपरटेंशन को लाइफस्टाइल डिसऑर्डर बताकर दिव्यांगता पेंशन से इनकार करना गलत है। कोर ...और पढ़ें

    पेंशन से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक भारतीय एयरफोर्स के अधिकारी को राहत देते हुए सुनाया फैसला। प्रतीकात्मक तस्वीर

    पेंशन से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक भारतीय एयरफोर्स के अधिकारी को राहत देते हुए सुनाया फैसला। प्रतीकात्मक तस्वीर

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पेंशन से जुड़े मामले में एक भारतीय एयरफोर्स के अधिकारी को राहत देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ हाइपरटेंशन को लाइफस्टाइल डिसऑर्डर कहना दिव्यांगता पेंशन देने से इन्कार करने के लिए पर्याप्त नहीं है। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव व न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने कहा कि हर व्यक्ति की अलग-अलग लाइफस्टाइल होती है और मेडिकल बोर्ड की जिम्मेदारी है कि वह व्यक्ति की ठीक से जांच करने के बाद अपने नतीजे के कारण बताए।

    केंद्र सरकार की अपील याचिका में कोई दम नहीं

    पीठ ने यह टिप्पणी आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल के एक आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र की याचिका को खारिज करते हुए की। ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया था कि एयर फोर्स अधिकारी हाइपरटेंशन के लिए दिव्यांगता पेंशन के हिस्से का हकदार है। पीठ ने कहा कि अदालत का मानना है कि ट्रिब्यूनल के नतीजे में कोई गलती नहीं है और केंद्र सरकार की अपील याचिका में कोई दम नहीं है।

    दिव्यांगता पेंशन देने का किया विरोध

    एयरफोर्स अधिकारी अक्टूबर 1981 में भर्ती हुए थे और 37 साल से अधिक की सेवा पूरा करने के बाद मार्च 2019 में सेवानिवृत्त हो गए थे। केंद्र सरकार ने अपील याचिका में हाइपरटेंशन के लिए दिव्यांगता पेंशन देने का विरोध करते हुए तर्क दिया कि अधिकारी को शांति वाले इलाके में यह दिव्यांगता हुई थी।

    हाइपरटेंशन एक लाइफस्टाइल दिव्यंगता क्यों?

    हालांकि, कोर्ट ने फैसले में कहा कि एयरफोर्स में नियुक्ति के समय अधिकारी को कोई दिव्यांगता नहीं थी। मेडिकल बोर्ड ने अपने इस नतीजे के समर्थन में कोई कारण नहीं बताया कि शुरुआती हाइपरटेंशन की दिव्यांगता सैन्य सेवा से संबंधित नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि बोर्ड ने यह बताने के लिए भी कोई कारण नहीं बताया कि हाइपरटेंशन एक लाइफस्टाइल दिव्यंगता क्यों है?

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