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    मान्यता रद होने पर भी वसूलते रहे फीस, दिल्ली HC ने फटकारते हुए कहा-स्कूल वाले अब 35 छात्रों के दाखिले का देंगे खर्च

    Updated: Sun, 18 Jan 2026 06:02 PM (IST)

    दिल्ली हाईकोर्ट ने एक निजी स्कूल को फटकार लगाई है, जिसने मान्यता रद होने के बावजूद 35 छात्रों से महीनों तक फीस वसूली। अदालत ने आदेश दिया है कि स्कूल इ ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर।

    प्रतीकात्मक तस्वीर।

    HighLights

    1. स्कूल को 35 छात्रों के दाखिले का पूरा खर्च उठाना होगा।

    2. मान्यता रद्द होने के बाद भी स्कूल ने महीनों तक फीस वसूली।

    3. सीबीएसई छात्रों की सूची अपनी वेबसाइट पर जारी करेगा।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। छात्रों के भविष्य के साथ लापरवाही करने वाले निजी स्कूल के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने आदेश दिया है कि जिन 35 छात्रों से मान्यता रद होने के बावजूद महीनों तक फीस वसूली गई, उनके दूसरे स्कूल में दाखिले का पूरा खर्च अब वही स्कूल देगा।

    सीबीएसई इन छात्रों की सूची जारी करे

    न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने साफ कहा कि 11वीं कक्षा के इन छात्रों का भविष्य किसी भी हाल में खराब नहीं होने दिया जाएगा। अदालत ने निर्देश दिया कि इन छात्रों को दूसरे स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए और सीबीएसई इन छात्रों की सूची अपनी वेबसाइट पर जारी करे, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

    मामले की अगली तारीख 23 जनवरी तय की

    हाईकोर्ट ने कहा है कि स्कूल द्वारा गैरकानूनी तरीके से वसूली गई फीस लौटाने के मुद्दे पर अगली सुनवाई की जाएगी। मामले की अगली तारीख 23 जनवरी तय की गई है। वहीं दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि जरूरत पड़ने पर इन छात्रों को पश्चिमी जिले के सरकारी स्कूलों में दाखिला देने की व्यवस्था की जा सकती है।

    छात्रों की ओर से पेश अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने बताया कि पहले ही हाई कोर्ट के आदेश से 12वीं के छात्रों को बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल चुकी है। अब 11वीं के छात्रों को भी राहत मिली है, जिनका पूरा शैक्षणिक सत्र बर्बाद होने का खतरा था।

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    मान्यता गई, जानकारी नहीं दी

    मामला दिल्ली के एक स्कूल से जुड़ा है। सीबीएसई ने अप्रैल 2025 में स्कूल की नौवीं से 12वीं तक की मान्यता रद कर दी थी, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने यह बात छात्रों और अभिभावकों से छिपाए रखी।

    इसके बावजूद दिसंबर 2025 तक नियमित रूप से फीस ली जाती रही। स्कूल ने 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों से बोर्ड परीक्षा शुल्क भी वसूला। दिसंबर के आखिरी सप्ताह में अचानक छात्रों को बताया गया कि स्कूल की मान्यता पहले ही रद हो चुकी है। इसके बाद छात्रों और अभिभावकों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की।

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