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    'हर बार ससुराल पक्ष दोषी नहीं, महिलाएं भी करती हैं कानून का दुरुपयोग', दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

    Updated: Sat, 17 Jan 2026 07:19 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में पारिवारिक विवादों और दहेज उत्पीड़न मामलों पर अहम टिप्पणियां की हैं। कोर्ट ने कहा कि ससुराल वाले हमेशा दोषी नहीं होते और ...और पढ़ें

    दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में पारिवारिक विवादों और दहेज उत्पीड़न मामलों पर अहम टिप्पणियां की हैं। फाइल फोटो

    दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में पारिवारिक विवादों और दहेज उत्पीड़न मामलों पर अहम टिप्पणियां की हैं। फाइल फोटो

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में पारिवारिक विवादों और दहेज उत्पीड़न के मामलों में अहम टिप्पणियां करते हुए कहा कि ससुराल वाले हमेशा दोषी नहीं होते और महिलाएं भी कानून का गलत इस्तेमाल कर सकती हैं। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि कानून का गलत इस्तेमाल न सिर्फ सिस्टम पर बोझ डालता है, बल्कि सही न्याय पर भी असर डालता है।

    पति और ससुर के खिलाफ FIR दर्ज

    जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने इस मामले में पत्नी द्वारा दायर दहेज उत्पीड़न की शिकायत को खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि मुकदमा दायर करने के पीछे महिला का मकसद अपने पति और ससुर से ज़्यादा से ज़्यादा पैसे ऐंठना था।

    बेंच ने यह भी कहा कि महिला शादी के दो साल बाद 2011 में अपना ससुराल छोड़कर चली गई थी और कई सालों तक वापस नहीं लौटी। 2016 में उसने अपने पति और ससुर के खिलाफ FIR दर्ज कराई, जिसमें दहेज उत्पीड़न समेत कई गंभीर आरोप लगाए।

    कोर्ट ने महिला के व्यवहार को लालची बताया और कहा कि मीडिएशन के रिकॉर्ड से भी साफ़ पता चलता है कि महिला नई-नई मांगें करती रही, कभी 50 लाख रुपये तो कभी साउथ दिल्ली में फ़्लैट की मांग करती रही।

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    कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे मामलों से न सिर्फ पुलिस और अदालतों का समय बर्बाद होता है, बल्कि परिवारों की शांति और न्यायिक प्रक्रिया पर भी असर पड़ता है। बेंच ने आरोपी पति और ससुर को सभी आरोपों से बरी कर दिया। बेंच ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान यह साफ हो गया कि दहेज उत्पीड़न कानून का गलत इस्तेमाल किया जा रहा था।

    एक परिवार दहेज उत्पीड़न के मामले की वजह से सालों से पुलिस और अदालतों के चक्कर लगा रहा है। बेंच ने कहा कि अदालतों को कानून के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने की ज़रूरत है।

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