दिल्ली में अधिसूचित धरोहरों के आसपास अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट सख्त, MCD को सर्वे का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को अधिसूचित धरोहरों के आसपास अवैध निर्माण का सर्वे करने का आदेश दिया है। यह सर्वे तीन महीने में पूरा करना होगा ताक ...और पढ़ें

अधिसूचित धरोहरों के आसपास अवैध निर्माण होने के पता लगाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने दिए आदेश।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में अधिसूचित धरोहरों के आसपास अवैध निर्माण होने के पता लगाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को सर्वे कराने का आदेश दिया है।
धरोहरों के पास होने वाले अनधिकृत निर्माण से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि एमसीडी को निर्देश दिया कि सर्वे में यह ठीक से पता लगाया जाएगा कि धरोहरों के आसपास की इमारतों में किए गए निर्माण नियमों और बिल्डिंग प्लान के अनुसार हैं या नहीं। अदालत ने समयसीमा तय करते हुए कहा कि सर्वे तीन महीने के अंदर पूरा किया जाएगा।
अदालत ने कहा कि एमसीडी द्वारा बनाई जाने वाली सर्वे टीम में हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी के अध्यक्ष द्वारा नामित किए गए एक अधिकारी को भी शामिल किया जाए।
अदालत ने निर्देश दिया कि इन याचिकाओं में बताई गई हर अधिसूचित धरोहरों के संबंध में सर्वे रिपोर्ट इस कोर्ट में अलग से दाखिल की जाएगी। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट की एक प्रति याचिकाकर्ताओं के वकील को दी जाएगी। साथ ही अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अगली सुनवाई पर मामले पर अलग से अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं।
अदालत ने उक्त निर्देश अधिसूचित धरोहरों को लेकर विभिन्न याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिए। अदालत ने रिकार्ड पर लिया कि याचिकाओं में राष्ट्रीय धरोहर स्थल के आसपास की इमारतों में अनाधिकृत निर्माण से ऐतिहासिक ढ़ांचों के बदलते स्वरूप को लेकर चिंता व्यक्त की है। याचिका में कहा गया है कि अवैध व अनधिकृत निर्माण से इमारतों को नुकसान पहुंच रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऐतिहासिक धरोहरों के आसपास हो रहे निर्माण या हो चुके निर्माण से संपत्तियों का स्वरूप बदल जाता है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि ऐसे निर्माण कभी-कभी ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंचाते हैं और कई मामलों में बिल्डिंग प्लान को मंज़ूरी देते समय एमसीडी ने संबंधित बिल्डिंग बाय-लाज और यहां तक कि हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी की सलाह को भी नजरअंदाज किया। याचिका में कहा गया कि इन संपत्तियों के आसपास स्थित इमारतों के मालिक तय बिल्डिंग प्लान से हटकर निर्माण करते हैं और इसका धरोहरों पर भी बुरा असर पड़ता है।