यमुना बाजार बेदखली: हाई कोर्ट ने नोटिस पर रोक लगाने से किया इनकार, निवासियों को नई याचिका का विकल्प
दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना बाजार में जारी बेदखली नोटिसों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका तकनीकी रू ...और पढ़ें
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दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को यमुना बाजार क्षेत्र में जारी बेदखली नोटिसों में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया।
HighLights
हाई कोर्ट ने बेदखली नोटिसों पर रोक से किया इनकार।
एसोसिएशन की याचिका तकनीकी रूप से सुनवाई योग्य नहीं मानी।
निवासियों को उचित प्राधिकरण से नई याचिका का सुझाव।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को यमुना बाजार क्षेत्र में जारी बेदखली नोटिसों में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा कि यमुना बाजार रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका तकनीकी रूप से सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि इसमें स्थानीय निवासियों के अधिकृत शपथपत्र शामिल नहीं थे।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि यह जनहित याचिका नहीं है और निवासियों के अधिकार-पत्र के बिना एसोसिएशन की ओर से दायर की गई है, इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि निवासी उचित प्राधिकरण के साथ नई याचिका दायर कर सकते हैं।
सामूहिक बेदखली नोटिस को चुनौती दी गई
याचिका में डीडीएमए द्वारा जारी सामूहिक बेदखली नोटिस को चुनौती दी गई थी। निवासियों का कहना था कि घाटों पर बना निर्माण हालिया अतिक्रमण नहीं है, बल्कि वर्षों से वहां पंडा समुदाय रहकर धार्मिक गतिविधियां संचालित करता आ रहा है।
डीडीएमए ने पांच मई को यमुना बाजार घाट क्षेत्र की करीब 310 संरचनाओं को खाली करने का नोटिस जारी किया था।
इस जमीन से 15 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने को कहा
प्राधिकरण के अनुसार, यह इलाका हर वर्ष बाढ़ की चपेट में आता है और मानव जीवन व संपत्ति के लिए खतरा बनता है।
इसके बाद 18 मई को डीडीए ने भी नया नोटिस जारी कर ओ-जोन श्रेणी में आने वाली इस जमीन से 15 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने को कहा। आदेश में चेतावनी दी गई कि पालन नहीं होने पर बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के ढहाने की कार्रवाई की जाएगी।