दिल्ली में 21-23 मई तक ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल, आवश्यक सेवाएं हो सकती हैं बाधित
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने 21-23 मई तक हरित शुल्क वृद्धि और व्यावसायिक वाहनों पर प्रतिबंध के विरोध में तीन दिवसीय हड़ताल की घो ...और पढ़ें

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने 21-23 मई तक की हड़ताल की घोषणा। (AI Generated Image)
HighLights
एआईएमटीसी ने 21-23 मई तक तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की।
हरित शुल्क वृद्धि और BS-IV वाहनों पर प्रतिबंध मुख्य कारण।
आवश्यक सेवाओं सहित 25-30 हजार वाहन प्रभावित होने का अनुमान।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआइएमटीसी) ने व्यावसायिक वाहनों पर हरित शुल्क बढ़ाने व वायु प्रदूषण मामले में कुछ वर्ग के व्यावसायिक वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर प्रतिबंध जैसे फैसलों के विरूद्ध 21 से 23 मई तक तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है।
हड़ताल से प्रभावित राज्यों में दिल्ली के साथ ही हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब व हिमाचल प्रदेश जैसे नजदीक के राज्य होंगे। चिंता यह कि इस हड़ताल से आवश्यक सेवाओं (सब्जी, दूध, दवा) भी प्रभावित हो सकती है। क्योंकि, एआइएमटीसी ने हड़ताल में सभी सेवाओं के व्यावसायिक वाहनों के शामिल होने का दावा किया है। जिसपर ट्रांसपोर्ट संगठनों में मतभेद भी है। कई संगठन आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई में लगे वाहनों को हड़ताल से दूर रखने के पक्ष में हैं।
30 हजार व्यावसायिक वाहनों का परिचालन प्रभावित
हालांकि, पूर्व के दावों से इतर दिल्ली के टैक्सी, आटो व पर्यटन वाहनों ने हड़ताल से दूरी बना ली है। जबकि ओला, उबर जैसी कैब सेवाओं के चालकों के एक धड़े का संगठन हड़ताल में साथ देने की बात कही है। अनुमान के अनुसार, हड़ताल से प्रतिदिन 25 से 30 हजार व्यावसायिक वाहनों का परिचालन प्रभावित हो सकता है। जिसमें सात से 10 हजार आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई में लगे वाहन भी है।
हड़ताल की घोषणा कोई एक माह पूर्व हुई थी, जिसके लिए दिल्ली व आस-पास के राज्यों के 126 व्यावसायिक परिवहन संगठनों का साथ मिला है।
दिल्ली में आती सभी व्यावसायिक वाहनों पर हरित शुल्क बढ़ाया गया
एआइएमटीसी के अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने अन्यायपूर्ण तरीके से दिल्ली में आती सभी व्यावसायिक वाहनों पर हरित शुल्क बढ़ाया गया है। इसी तरह, बिना वैज्ञानिक कारण के बीएस-फोर व्यावसायिक वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर नवंबर माह से रोक लगा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि उन लोगों ने हर उचित फोरम पर अपनी मांग रखी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसलिए हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा।
टैक्सी, ऑटो, टूरिस्ट वाहनों ने बनाई दूरी, कैब संगठन समर्थन में
टैक्सी, ऑटो व पर्यटन वाहनों के संगठनों ने हड़ताल से दूरी बनाई है, जबकि कैब चालकों के एक संगठन ने ट्रांसपोर्टरों की मांग को समर्थन दिया है। दिल्ली आटो रिक्शा संघ व दिल्ली प्रदेश टैक्सी यूनियन के महामंत्री राजेंद्र शर्मा ने कहा कि वह लोग सीएनजी के दाम में वृद्धि के बाद किराया वृद्धि की मांग दिल्ली सरकार से कर रहे हैं, लेकिन वह इस हड़ताल में शामिल नहीं है।
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इसी तरह, दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि ईंधन के दाम में बढ़ोत्तरी अकेले भारत की समस्या नहीं है। युद्ध के चलते इस संकट से पूरा विश्व जूझ रहा है। ऐसे में वह हड़ताल कर इस कठिन वक्त में दिल्ली के लोगों की मुश्किलें बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।
जबकि, आल दिल्ली आटो, टैक्सी ट्रांसपोर्ट कांग्रेस यूनियन के उपाध्यक्ष रवि राठौर ने कहा कि वह लोग हड़ताल पर नहीं रहेंगे, पर ट्रांसपोर्टरों की मांगों के समर्थन में है।
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