फर्जी लिंक और लालच भरे मैसेज से ठगी, दिल्ली HC सख्त; जमानत खारिज कर कहा-डिजिटल सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
दिल्ली हाईकोर्ट ने वित्तीय लालच और ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े संदेश फैलाने के आरोप में अरिहंत जैन और अमरदीप शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। ...और पढ़ें

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि यह सार्वजनिक विश्वास और डिजिटल सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा हैं।

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। वित्तीय लालच और आनलाइन धोखाधड़ी के लिए धोखे वाले मैसेज और लिंक फैलाने से जुड़े अपराधों में बढ़ोतरी पर चिंता व्यक्त करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि यह सार्वजनिक विश्वास और डिजिटल सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा हैं।
दो आरोपितों अरिहंत जैन व अमरदीप शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने कहा कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से मिली शिकायतों से पता चला है कि दो आरोपितों द्वारा नियंत्रित एक कंपनी को जारी किए गए कई सिम नंबरों का इस्तेमाल लोन, स्वीकृत क्रेडिट और वित्तीय लालच से संबंधित धोखे वाले मैसेज फैलाने के लिए किया गया था।
अदालत ने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और पूरी साजिश का पता लगाने के लिए आरोपितों से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अदालत ने कहा कि आरोपों की गंभीरता, जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सुबूतों की प्रकृति, और साइबर-अपराध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आवेदकों को अग्रिम जमानत की असाधारण सुरक्षा देने का कोई आधार नहीं बनता है।
वहीं, सीबीआई ने अग्रिम जमानत की याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि अाराेपितों ने जानबूझकर गलत जानकारी व केवाईसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके हजारों सिम कार्ड प्राप्त किए गए थे। जांच एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि इस अपराध का समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और यह डिजिटल सुरक्षा को कमजोर करता है।
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वहीं, आरोपितों ने तर्क दिया कि आरोप निराधार हैं क्योंकि उनकी कंपनी द्वारा प्राप्त सभी 20,986 सिम कार्ड केवल एसएमएस वाले सिम थे, जिन्हें विशेष रूप से प्रचार मैसेजिंग के लिए खरीदा गया था। यह भी कहा कि चक्षु पोर्टल केवल संदिग्ध स्पैम के लिए एक नागरिक-रिपोर्टिंग प्लेटफार्म था। आरोपितों ने यह भी कहा कि धोखाधड़ी कुल 20,986 सिम में से केवल छह सिम नंबरों से संबंधित है।