किशोरियों को लगने वाली HPV Vaccine पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, केंद्र और ICMR से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने बिना पर्याप्त अध्ययन के एचपीवी वैक्सीन (गार्डसिल) को देश भर में लागू करने को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और आईसीएमआर स ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने एचपीवी वैक्सीन बुधवार को केंद्र सरकार और इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से जवाब मांगा है।
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने एचपीवी वैक्सीन पर मांगा जवाब।
बिना पर्याप्त अध्ययन वैक्सीन लागू करने पर चुनौती।
केंद्र सरकार, आईसीएमआर को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बिना पर्याप्त स्टडी के ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन, गार्डसिल को पूरे देश में लागू करने को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से जवाब मांगा है।
कैंसर होने का भी खतरा!
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने मामले को बेहद बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले पर अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। ये वैक्सीन यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यीआइपी) के तहत किशोर लड़कियों को दी जानी हैं। एचपीवी दुनिया भर में सबसे आम यौन संचारित संक्रमण है। हाई-रिस्क वाले एचपीवी वायरस से सर्वाइकल, एनल, गले का कैंसर हो सकता है।
लड़कियों से जुड़ा है मुद्दा
सुनवाई के दौरान पीठ ने एडिशनल सालिसिटर जनरल चेतन शर्मा से कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। वैक्सीनेशन एक अच्छी स्कीम है, लेकिन अगर इसके कुछ बुरे नतीजे सामने आते हैं, तो हमें बहुत सावधान रहना होगा। पीठ ने आगे कहा कि अदालत सरकार की नीयत पर शक नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह मुद्दा सभी लड़कियों से जुड़ा है और हमें बहुत सावधानी से आगे बढ़ना होगा।
14 साल की लड़की का उदाहरण दिया
गायनेकोलाजिस्ट डाॅ. सुजाता मित्तल और फिटनेस इन्फ्लुएंसर जितेंद्र चौकसे ने जनहित याचिका दायर कर वैक्सीन के डेटा, असर और जरूरत पर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने कहा कि स्कूलों में वैक्सीनेशन किया जा रहा है और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को पंजीकरण बढ़ाने का टारगेट दिया जाता है।
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इससे कई मामलों में कम उम्र की लड़कियों पर बेवजह दबाव पड़ता है। याचिकाकर्ताओं ने तमिलनाडु की एक 14 साल की लड़की का उदाहरण दिया, जिसे मार्च 2026 में वैक्सीन लगने के कुछ दिनों बाद गंभीर न्यूरोलाॅजिकल दिक्कतें हुईं। इनमें लकवे जैसी कमजोरी, आवाज चली जाना और देखने में दिक्कत जैसी समस्याएं शामिल थीं।
आजादी के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन
जनहित याचिका में ग्वालियर और बिहार में हुई ऐसी ही घटनाओं का भी जिक्र किया गया, ताकि वैक्सीन की सुरक्षा की निगरानी पर सवाल उठाए जा सकें। याचिका में तर्क दिया गया कि बिना उचित अध्ययन और पूरी जानकारी के साथ सहमति लिए वैक्सीन को पूरे देश में लागू करना, शारीरिक स्वायत्तता और व्यक्तिगत आजादी के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
याचिका में दावा किया गया कि सर्वाइकल कैंसर को रोकने में वैक्सीन के लंबे समय तक असरदार होने की बात पक्के तौर पर साबित नहीं हुई है और नियमित स्क्रीनिंग ही बचाव का सबसे असरदार तरीका है। याचिका में इस प्रोग्राम की न्यायिक जांच की मांग की गई है।