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    दिल्ली HC ने निजी स्कूलों की फीस कमेटी बनाने की समय-सीमा पर 20 फरवरी तक लगाई रोक

    Updated: Tue, 10 Feb 2026 06:10 AM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों को स्कूल-स्तरीय फीस नियमन समिति (SLFRC) बनाने की 10 फरवरी की अंतिम तिथि पर 20 फरवरी तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने दिल्ली ...और पढ़ें

    एसएलएफआरसी बनाने के लिए दी गई 10 फरवरी की अंतिम तारीख पर 20 फरवरी तक रोक लगा दी है।

    एसएलएफआरसी बनाने के लिए दी गई 10 फरवरी की अंतिम तारीख पर 20 फरवरी तक रोक लगा दी है।

    HighLights

    1. निजी स्कूलों की फीस कमेटी बनाने की समय-सीमा पर रोक।

    2. दिल्ली सरकार को 20 फरवरी तक दबाव न बनाने का निर्देश।

    3. 2026-27 सत्र की फीस निर्धारण पर कोई असर नहीं।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों को स्कूल-स्तरीय फीस नियमन समिति (एसएलएफआरसी) बनाने के लिए दी गई 10 फरवरी की अंतिम तारीख पर 20 फरवरी तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा है कि 20 फरवरी तक उन स्कूलों पर दबाव न बनाया जाए, जिन्होंने अभी तक समिति गठित नहीं की है।

    मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने निजी स्कूलों के संगठनों की याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि समिति गठन टालने से किसी भी पक्ष को नुकसान नहीं होगा और न ही सत्र 2026-27 के लिए फीस तय करने की समय-सीमा प्रभावित होगी। अदालत 20 फरवरी को रोक की मांग पर अगली सुनवाई करेगी।

    दिल्ली सरकार ने एक फरवरी को एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर निजी स्कूलों को 10 दिनों के अंदर एसएलएफआरसी बनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद स्कूल प्रबंधन को अगले तीन शैक्षणिक सत्रों (2026-27 से) के लिए प्रस्तावित फीस का ब्यौरा देना था। सरकार का कहना था कि समय बढ़ाने से मार्च तक फीस तय करने की प्रक्रिया प्रभावित होगी।

    हालांकि, कोर्ट ने कहा कि पहले दी गई समय-सीमा एक फरवरी के नोटिफिकेशन से पहले की थी और अब हालात बदल चुके हैं। याचिकाकर्ता संगठनों का तर्क है कि फीस नियमन कानून, 2025 के तहत एसएलएफआरसी 15 जुलाई तक बनाई जानी है। ऐसे में बिना कानून में संशोधन के पहले अंतिम तारीख तय करना मनमाना और गैरकानूनी है।

    नए ढांचे के तहत हर निजी स्कूल में बनने वाली एसएलएफआरसी में स्कूल प्रबंधन, प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक, पांच अभिभावक और शिक्षा विभाग का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। चयन लाटरी के जरिए और पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में होना है।

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