'आपकी टाइमलाइन मेल न खाने से छात्रों को परेशानी नहीं होनी चाहिए', CBSE और JSAA को दिल्ली HC की दो टूक
दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीएसई और जेएसएए की समय-सीमा में तालमेल न होने के कारण छात्रों के दाखिले रद्द होने ...और पढ़ें

दाखिलों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी। फोटो: आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने सीबीएसई और जेएसएए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा
छात्रों को दाखिले रद्द होने से परेशानी नहीं होनी चाहिए: कोर्ट
सीबीएसई-जेएसएए की समय-सीमा में तालमेल न होने का मामला
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि बड़े संस्थानों में दाखिले के लिए छात्र महीनों तक तैयारी करते हैं, उन्हें सिर्फ इसलिए परेशानी नहीं होनी चाहिए क्योंकि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और ज्वाइंट सीट एलोकेशन अथाॅरिटी (JSAA) की समयसीमा आपस में मेल नहीं खाती हैं।
दाखिला रद होने पर हाई कोर्ट पहुंचे छात्र
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने उक्त टिप्पणी दो छात्रों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की। इन छात्रों का आईआईटी दिल्ली और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) में दाखिला इसलिए रद कर दिया गया था कि क्योंकि वे 12वीं कक्षा की न्यूनतम योग्यता शर्तों को बहुत कम अंतर से पूरा नहीं कर पाए थे और अपने कम्पार्टमेंट और इम्प्रूवमेंट परीक्षाओं के नतीजों का इंतजार कर रहे थे।
पीठ ने इसके साथ ही दो याचिकाओं पर सीबीएसई व जेएसएए को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता दक्ष सिंघल और पारस बत्रा ने याचिका दायर है। एसटी श्रेणी के उम्मीदवार दक्ष सिंघल को आईआईटी दिल्ली में बीटेक (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) में दाखिला मिला था और पारस बत्रा को एसपीए बी.आर्किटेक्ट प्रोग्राम में सीट मिली थी।
न्यूनतम अंकों से मामूली अंतर बना वजह
सिंघल ने जेईई (एडवांस्ड) 2026 में एसटी रैंक 144 हासिल की थी, लेकिन 12वीं कक्षा की परीक्षा में गणित में 64.2 प्रतिशत अंक ही प्राप्त कर पाए, जो एसटी उम्मीदवारों के लिए जरूरी 65 प्रतिशत की सीमा से थोड़ा कम था। इसके बाद उनकी सीट रद कर दी गई।
इसी तरह, पारस बत्रा तय कुल अंकों की जरूरत से 0.2 प्रतिशत पीछे रह गए थे और उनका दाखिला भी रद कर दिया गया था। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
समयसीमा पर कोर्ट ने जताई चिंता
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सीबीएसई कम्पार्टमेंट और इम्प्रूवमेंट परीक्षाएं 28 जुलाई को होनी हैं, जो 15 जुलाई की समय-सीमा और जेएसएए काउंसलिंग पूरी होने के बाद की तारीख है।
जेएसएए और संबंधित संस्थानों ने कहा कि सभी सीटें पहले ही आवंटित की जा चुकी हैं और शैक्षणिक संस्थानों को उनके प्रास्पेक्टस या एडमिशन ब्रोशर की शर्तों के खिलाफ काम करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता है।
हालांकि, पीठ ने कहा कि अगर 15 जुलाई की समय-सीमा को अनिवार्य माना जाए, तो 28 जुलाई को होने वाली कम्पार्टमेंट और इम्प्रूवमेंट परीक्षाओं में बैठने वाले सभी छात्र दाखिले के लिए अपने आप अयोग्य हो जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।
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