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    दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा- क्या वाट्सएप पर सेव नंबर्स की जानकारी देना निजता का उल्लंघन नहीं?

    Updated: Tue, 07 Apr 2026 06:44 PM (GMT+05:30)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बम धमकी के आरोपी के व्हाट्सएप पर सेव किए गए मोबाइल नंबरों की जानकारी मांगने वाली दिल्ली पुलिस की याचिका पर निजता के अधिकार पर प ...और पढ़ें

    दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बम धमकी के आरोपी के व्हाट्सएप पर सेव किए गए मोबाइल नंबरों की जानकारी मांगने वाली दिल्ली पुलिस की याचिका पर निजता के अधिकार पर पड़ने वाले असर पर चिंता जताई है।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बम धमकी के आरोपी के व्हाट्सएप पर सेव किए गए मोबाइल नंबरों की जानकारी मांगने वाली दिल्ली पुलिस की याचिका पर निजता के अधिकार पर पड़ने वाले असर पर चिंता जताई है। 

    HighLights

    1. HC ने बम धमकी आरोपी के व्हाट्सएप नंबरों पर चिंता जताई।

    2. निजता के अधिकार पर संभावित असर को रेखांकित किया।

    3. पुलिस की मांग पर व्हाट्सएप से जवाब मांगा गया।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जून 2025 में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय को बम से उड़ाने की झूठी धमकी देने के आरोपी व्यक्ति के वाट्सएप पर सेव किए गए मोबाइल नंबरों की जानकारी देने से निजता के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

    दिल्ली पुलिस की याचिका पर निजता संबंधी चिंताओं को उठाते हुए न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने नोटिस जारी कर वाट्सएप से जवाब मांगा है।

    अदालत ने पुलिस की अर्जी पर आपत्ति जातते हुए पूछा कि क्या आरोपित द्वारा वाट्सएप पर सेव किए गए नंबरों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। अदालत ने इस बात की तरफ इशारा किया कि आरोपित ऐसे लोगों के नंबर भी सेव कर सकता है, जिन्हें यह पता भी नहीं होगा कि उनका नंबर सेव किया गया है।

    अदालत ने कहा कि कोई भी किसी सरकारी विभाग की डायरेक्टरी उठाकर कुछ नंबर वाट्सएप में सेव कर सकता है। फिर पुलिस उस व्यक्ति की जानकारी और डेटा की मांग करेगी।

    इसके बाद पुलिस किसी और के नंबर की जांच-पड़ताल शुरू करेगी, तब तो कोई निजता बचेगी ही नहीं। पीठ ने पुलिस से सवाल किया कि मान लीजिए, जांच का सामने करने वाले व्यक्ति ने किसी पुलिस अधिकारी या वकील का नंबर बिना किसी संपर्क के सेव कर रखा है, तो आप उसके बारे में क्या करेंगे?

    दिल्ली पुलिस ने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के फैसले के खिलाफ अपील याचिका दायर की है। इसमें सीजीएम ने एक ऐसे व्यक्ति के वाट्सएप नंबर से जुड़ा एन्क्रिप्टेड डेटा जारी करने का निर्देश देने से इन्कार कर दिया था, जिस पर बम से जुड़ी झूठी धमकियां देने का आरोप है।

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    सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता तर्क दिया कि वाट्सएप से डेटा की जरूरत इसलिए है, ताकि यह जांच की जा सके कि क्या आरोपित किसी तीसरे पक्ष के संपर्क में था। पुलिस ने कहा कि धमकी भरी काल इसी नंबर से आइ थी। पुलिस ने कहा कि इस बारे में जानकारी मांगी है कि इस नंबर के वाट्सएप पर कौन-कौन से मोबाइल नंबर सेव किए गए थे।

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