PM आवास के पास झुग्गी वालों को दिल्ली HC का अल्टीमेटम, 6 हफ्ते में खाली करें जगह; DUSIB देगा नया घर
दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री के रेस कोर्स स्थित आवास के पास की तीन झुग्गियों के निवासियों को छह सप्ताह में जगह खाली करने का आदेश दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने झुग्गियों को हटाने का आदेश दिया। फोटो: आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने पीएम आवास के पास की झुग्गियां खाली करने को कहा
निवासियों को छह सप्ताह में वैकल्पिक जगह पर जाने का निर्देश
डुसिब को वैकल्पिक आवास और सुविधाएं देने का आदेश
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रेस कोर्स स्थित आवास के पास की तीन झुग्गी-झोपड़ियों के निवासियों को दिल्ली हाई कोर्ट ने छह सप्ताह के अंदर जगह खाली करने और उन्हें उपलब्ध कराई गई जगह पर जाने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने साथ ही यह स्पष्ट किया कि छह सप्ताह के बाद पुलिस की मदद से सरकार जमीन खाली करवा सकती है।
अदालत ने कहा कि दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डुसिब) को निर्देश दिया कि लोगों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराएं और वहां पर जरूरी सुविधाएं देना सुनिश्चित करें। पीठ ने यह भी कहा कि इस मामले में निवासियों को दूसरी जगह बसाने में पुनर्वास नीति का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।
छह सप्ताह में खाली करनी होगी जगह
हालांकि, पीठ ने कहा कि सरकार अपने वादों और कोर्ट के पिछले आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य होगी और डुसिब को कॉलोनी में सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।
कोर्ट ने निवासियों के पुनर्वास की निगरानी करने और किए गए वादे को निभाना सुनिश्चित करने के लिए पूर्व जज मनमोहन शर्मा की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई है।
इस समिति में दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के सदस्य भी शामिल होंगे। कोर्ट ने सरकार को इस समिति के गठन की सूचना तुरंत जारी करने का आदेश दिया।
तीन कैंप के निवासियों ने दी थी चुनौती
अदालत ने उक्त आदेश भाई राम कैंप, डीआईडी कैंप और मस्जिद कैंप के निवासियों द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं ने उन्हें हटाए जाने संबंधी एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी।
यहां रहने वाले निवासियों को बाहरी दिल्ली के सावदा घेवरा में डुसिब कॉलोनी में बसाया जा रहा है। सरकार ने तर्क दिया था कि नई जगह पर सीवर लाइन, पानी की सप्लाई, पार्क और सड़कें पहले से मौजूद हैं और वहां और भी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
