पियर-सी शुरू होते ही IGI एयरपोर्ट पर इंटरनेशनल यात्रियों को बड़ी राहत, निर्बाध स्थानांतरण के साथ घटेगा ट्रांजिट टाइम
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर जल्द ही अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए पियर-सी की सुविधा शुरू होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय ...और पढ़ें
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हवाई यात्रियों के लिए आईजीआई एयरपोर्ट पर एक अलग पियर की सुविधा शुरू होने जा रही है।
HighLights
पियर-सी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की क्षमता और संचालन बढ़ाएगा।
ट्रांजिट यात्रियों को तेज, आसान और झंझट-मुक्त कनेक्टिविटी मिलेगी।
IGI एयरपोर्ट अब अंतरराष्ट्रीय हब के रूप में विकसित होगा।
मुकेश ठाकुर, नई दिल्ली। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (आइजीआइ) से अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले सप्ताह में एक अलग पियर की सुविधा शुरू होने जा रही है। अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल-3 (टी-3) पर तैयार पियर-सी के शुरू होते ही न केवल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या और संचालन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ट्रांजिट यात्रियों को तेज, आसान और बिना झंझट कनेक्टिविटी का सीधा लाभ मिलेगा।
अधिकारियों के अनुसार, सभी विभागीय मंजूरियां अगले एक सप्ताह में मिलने की संभावना है, जिसके तुरंत बाद पियर-सी को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए आपरेशनल कर दिया जाएगा। अभी तक जहां दो पियर अंतरराष्ट्रीय और दो घरेलू उड़ानों के लिए इस्तेमाल होते थे, वहीं अब तीन पियर (ए,बी और सी) विदेशी उड़ानों के लिए इस्तेमाल होंगे और केवल एक पियर डी घरेलू उड़ानों के लिए।
इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को कम भीड़, तेज बोर्डिंग और बेहतर फ्लाइट मैनेजमेंट का फायदा मिलेगा। वहीं एक अन्य पियर ई का निर्माण कार्य चल रहा है, जो 2028 में पूरा होगा, जो सीधे रूप से टी-3 की क्षमता को 20 प्रतिशत तक बढा देगा।
उड़ानों के बीच टर्नअराउंड टाइम भी कम होगा
गौरतलब हो कि हवाई अड्डे के पियर वे लंबे कारिडोरनुमा ढांचे होते हैं, जो मुख्य इमारत से बाहर होते हैं। जहां विमान खड़े होते हैं और यात्री एयरोब्रिज के जरिए सीधे विमान में सवार होते हैं। पियर-सी को इंटरनेशनल जोन में बदलने से विमान पार्किंग और यात्री हैंडलिंग की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे उड़ानों के बीच टर्नअराउंड टाइम भी कम होगा, जो उड़ान के समय को बचाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि भारतीय यात्रियों का रुझान तेजी से अंतरराष्ट्रीय यात्रा की ओर बढ़ा है। दक्षिण-पूर्व एशिया, यूरोप और मध्य एशिया के गंतव्यों की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। फिलहाल टी-3 रोजाना करीब 1.05 लाख यात्रियों को संभाल रहा है, जिनमें लगभग 60 हजार अंतरराष्ट्रीय और 45 हजार घरेलू यात्री शामिल हैं। ऐसे में इंटरनेशनल ट्रैफिक को प्राथमिकता देना जरूरी हो गया था।
सबसे बड़ा फायदा ट्रांजिट यात्रियों को मिलेगा
पियर-सी के साथ सबसे बड़ा फायदा ट्रांजिट यात्रियों को मिलेगा। दुबई और सिंगापुर जैसे ग्लोबल हब की तर्ज पर विकसित की जा रही यह इस सुविधा में एयरपोर्ट पर एयरसाइड ट्रांसफर सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत यात्री बिना एयरपोर्ट से बाहर निकले ही एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल या एक फ्लाइट से दूसरी फ्लाइट तक पहुंच सकेंगे। बसों के जरिए यह ट्रांसफर होगा, जिससे कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा और समय की भी बचत होगी।
एयरपोर्ट पर बढ़ते यात्रियों संख्या के दबाव को संतुलित करने के लिए अन्य टर्मिनलों की क्षमता भी बढ़ाई गई है। टर्मिनल-1 की सालाना क्षमता 1.7 करोड़ से बढ़ाकर 4 करोड़ यात्रियों तक कर दी गई है, जबकि टर्मिनल-2 की क्षमता 1.7 करोड़ है। टी-3 पर बचा हुआ घरेलू पियर करीब 1.2 करोड़ यात्रियों को संभाल सकेगा। योजना के तहत अब टर्मिनल-1 और टर्मिनल-2 घरेलू उड़ानों का दबाव संभालेंगे, जबकि टी-3 को पूरी तरह इंटरनेशनल हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
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