दिल्ली लगातार तीसरे साल सड़क हादसों में सर्वाधिक मौतों वाला शहर, चौंकानेवाले हैं NCRB के आंकड़े
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली लगातार तीसरे साल सड़क हादसों में सर्वाधिक मौतों वाला शहर बन गया है। वर्ष 2 ...और पढ़ें
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दिल्ली में सड़क हादसों में हो रही बड़ी मौतें।

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली लगातार तीसरे साल देश के 53 बड़े शहरों में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मौतों वाला शहर बन गया है।
वर्ष 2024 में दिल्ली में सड़क दुर्घटनाओं के 5,573 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 4,718 लोग घायल हुए जबकि 1,551 लोगों की मौत हो गई। यह आंकड़ा देश के किसी भी अन्य शहर से अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार, सड़क हादसों के मामलों में बेंगलुरु दूसरे स्थान पर रहा, जहां 4,769 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं 3,785 मामलों के साथ हैदराबाद तीसरे स्थान पर रहा। इससे पहले वर्ष 2023 में दिल्ली में 5,715 सड़क हादसों में 1,457 लोगों की जान गई थी, जबकि 2022 में 5,387 दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं। लगातार बढ़ते आंकड़े राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था और सड़क सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
दोपहिया वाहन चालकों पर सबसे अधिक खतरा
रिपोर्ट में दोपहिया वाहनों से जुड़े हादसों को सबसे घातक श्रेणी बताया गया है। वर्ष 2024 में दिल्ली में बाइक और स्कूटर दुर्घटनाओं में 687 लोगों की मौत हुई, जो देश में सबसे अधिक है। इसके बाद बेंगलुरु में 467 और चेन्नई में 297 लोगों की जान गई। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि तेज रफ्तार, हेलमेट का सही तरीके से इस्तेमाल न करना और हाईवे पर लापरवाही से वाहन चलाना इन हादसों की बड़ी वजह है।
एसयूवी और जीप से जुड़े हादसों में भी दिल्ली सबसे आगे
एसयूवी कार और जीप से जुड़े हादसों में भी दिल्ली देश में पहले स्थान पर रही। ऐसे हादसों में 1,112 लोग घायल हुए जबकि 288 लोगों की मौत हुई। जयपुर दूसरे स्थान पर रहा, जहां 577 लोग घायल और 135 लोगों की मौत हुई।
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वहीं भोपाल में 409 लोग घायल हुए और 58 लोगों की जान गई। तीन पहिया वाहनों यानी आटो-रिक्शा से जुड़े हादसों में दिल्ली में 321 लोग घायल हुए और 95 लोगों की मौत दर्ज की गई। मौतों के मामले में दिल्ली दूसरे स्थान पर रही, जबकि प्रयागराज में सबसे अधिक 104 मौतें हुईं।
नियमों की अनदेखी और सड़क इंजीनियरिंग में खामियां हादसों की वजह
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में बढ़ती वाहन संख्या, तेज रफ्तार, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और सड़क इंजीनियरिंग की खामियां हादसों की बड़ी वजह हैं। विशेषज्ञों ने सख्त प्रवर्तन, बेहतर सड़क डिजाइन और जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत बताई है।
| श्रेणी | दिल्ली | अन्य प्रमुख शहर |
|---|---|---|
| कुल सड़क हादसे | 5,573 | बेंगलुरु - 4,769 हैदराबाद - 3,785 |
| कुल मौतें | 1,551 | देश में सबसे अधिक |
| दोपहिया हादसों में मौतें | 687 | बेंगलुरु - 467 चेन्नई - 297 |
| SUV/जीप हादसों में मौतें | 288 | जयपुर - 135 भोपाल - 58 |
| SUV/जीप हादसों में घायल | 1,112 | जयपुर - 577 भोपाल - 409 |
| आटो-रिक्शा हादसों में मौतें | 95 | प्रयागराज - 104 |
| आटो-रिक्शा हादसों में घायल | 321 | हैदराबाद - 288 |
रेलवे से जुड़े अपराधों के मामलों में भी राजधानी आगे
दिल्ली में वर्ष 2024 में सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के अंतर्गत अपराध दर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक रही, जहां प्रति लाख जनसंख्या पर 24.3 मामले दर्ज किए गए।
एनसीआरबी के आंकड़ाें के मुताबिक, राजधानी में 2024 में जीआरपी ने 5,315 मामले दर्ज किए, जो 2023 के 5,176 मामलों और 2022 के 3,243 प्रकरणों से अधिक हैं। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशियों के साथ रेलवे परिसर में किए गए सर्वाधिक 64 मामले दर्ज किए गए, जो वर्ष 2023 में 63 दर्ज किए गए थे।