रिश्वत कांड से फिर शर्मसार हुआ जेल प्रशासन, सुकेश चंद्रशेखर से लेकर टिल्लू हत्याकांड तक; दागदार रहा है इतिहास
रोहिणी जेल में उगाही और रिश्वतखोरी का सिंडिकेट उजागर होने से दिल्ली की जेलों में भ्रष्टाचार का पुराना खेल फिर सामने आया है। यह घटना सुकेश चंद्रशेखर, चंद्रा बंधुओं और टिल्लू ताजपुरिया हत्याकांड जैसे पिछले मामलों की याद दिलाती है।

रिश्वत कांड से जेल प्रशासन सवालों के घेरे में। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
रोहिणी जेल में उगाही सिंडिकेट का भंडाफोड़
असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट और वार्डर गिरफ्तार हुए
दिल्ली की जेलों में भ्रष्टाचार का लंबा इतिहास
गौतम कुमार मिश्रा, पश्चिमी दिल्ली। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) द्वारा रोहिणी जेल में उजागर किया गया उगाही और रिश्वतखोरी का यह नया सिंडिकेट कोई पहली घटना नहीं है।
रोहिणी जेल के सहायक अधीक्षक सुनील कुमार और आधा दर्जन वार्डरों की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि तमाम दावों और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के बावजूद, जेलों के भीतर ''रिश्वत के बदले राहत'' का यह काला खेल आज भी बदस्तूर जारी है।
देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली दिल्ली की तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलें पिछले कई वर्षों से इस तरह के ''अपराधी-अधिकारी गठजोड़'' के लिए बदनाम रही हैं।
वीआईपी ट्रीटमेंट से लेकर सुरक्षा के नाम पर वसूली और जेल के भीतर से गिरोह चलवाने तक में कई बार बड़े जेल अधिकारियों के नाम सामने आ चुके हैं।
रडार पर आए थे 80 से अधिक जेलकर्मी
ऐसे मामले में सबसे पहले महाठग सुकेश चंद्रशेखर मामला सामने आया। इसमें 80 से अधिक जेलकर्मी रडार पर आए थे। दिल्ली की जेलों के इतिहास में सुरक्षा और ईमानदारी की धज्जियां उड़ाने वाला यह सबसे बड़ा मामला था।
इस मामले में जेल के भीतर बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने रसूखदार लोगों से करोड़ों की ठगी की। जांच में सामने आया कि सुकेश जेल प्रशासन को हर महीने करोड़ों रुपये की रिश्वत देता था।
इस मामले की जांच के बाद तिहाड़ और रोहिणी जेल के लगभग 82 जेल अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस और ईडी की गाज गिरी थी। कई वार्डन और सहायक अधीक्षकों को गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि उन्होंने सुकेश को जेल के अंदर मोबाइल फोन और अलग से बैरक जैसी अवैध सुविधाएं मुहैया कराई थीं।
लगे थे वीआईपी ट्रीटमेंट देने के आरोप
ऐसा ही मामला यूनिटेक प्रमोटर चंद्रा बंधुओं से जुड़ा था। तिहाड़ जेल के भीतर वीआइपी ट्रीटमेंट के आरोप से जुड़े इस मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थी।
यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा और अजय चंद्रा तिहाड़ जेल में बंद थे।आरोप लगा कि उनके पास न केवल मोबाइल फोन थे, बल्कि वे जेल अधिकारियों के दफ्तरों का इस्तेमाल अपने लोगों से मिलने के लिए कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जब तत्कालीन दिल्ली पुलिस आयुक्त ने जांच की, तो तिहाड़ के कई जेलकर्मियों की मिलीभगत सामने आई थी। इसके बाद आरोपितों को दिल्ली से बाहर की जेलों में शिफ्ट किया गया था।
ताजपुरिया हत्याकांड से सवालों में आया प्रशासन
मई 2023 में तिहाड़ जेल के भीतर प्रतिद्वंद्वी गोगी गैंग के गुर्गों ने गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया की बेरहमी से हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड के सीसीटीवी फुटेज ने देश को झकझोर कर रख दिया था।
फुटेज में साफ दिख रहा था कि जब टिल्लू पर नुकीले हथियारों से ताबड़तोड़ वार किए जा रहे थे, तब वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी और जेल स्टाफ मूकदर्शक बनकर खड़े थे।
इस मामले में कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने के आरोप में कई जेल अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों का तबादला किया गया था और कई को निलंबित किया गया था।
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