चंद्रग्रहण और सूतक के दौरान मंदिरों के पट रहे बंद, घरों में कड़े रहे नियम
मंगलवार शाम दिल्ली में चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिरों के पट बंद रहे और सूतक काल के नियम कड़ाई से ...और पढ़ें

चंद्र ग्रहण को लेकर दिल्ली के अधिकतर मंदिरों के पट बंद रहे।

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मंगलवार की शाम दिल्ली का आकाश एक दुर्लभ खगोलीय घटना का गवाह बना। वर्ष के पहले चंद्र ग्रहण को लेकर दिल्ली के अधिकतर मंदिरों के पट बंद रहे। वहीं, खगोल प्रोमियों के लिए यह अद्भूत मौका रहा, लोगों ने आकाश को निहारते हुए चंद्रग्रहण को देखा। चंद्रमा का हल्का लाल रंग बेहद अद्भुत लग रहा था, हालांकि दिल्ली के प्रदूषण और धुंध के कारण नजारा बीच-बीच में ओझल भी होता रहा।
वहीं, दिनभर पट बंद रखने के बाद शाम को मंदिरों में विधिविधान व भक्तिभाव से शुद्धिकरण हुआ। कालकाजी मंदिर, झंडेवालान और बिड़ला मंदिर में सुबह 6:23 बजे से ही 'सूतक काल' शुरू होने के कारण कपाट बंद कर दिए गए थे। ग्रहण के दौरान भगवान की मूर्तियों को स्पर्श करना वर्जित था, इसलिए दोपहर भर मंदिरों के द्वार श्रद्धालुओं के लिए बंद रहे। शाम 6:47 बजे ग्रहण समाप्त होने (मोक्ष काल) के बाद मंदिरों में विशेष साफ-सफाई की गई।
मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराया गया और देर शाम विशेष शुद्धिकरण आरती की गई, जिसके बाद भक्तों को दर्शन की अनुमति मिली। वहीं, घरों में ग्रहण काल (दोपहर 3:20 से शाम 6:47) के दौरान अधिकांश घरों में भोजन नहीं पका। लोगों ने पहले से बने भोजन और पानी के बर्तनों में तुलसी के पत्ते और कुशा डाल कर रखे थे।
घरों में बुजुर्गों ने गर्भवती महिलाओं को नुकीली चीजों से दूर रहने और घर के अंदर ही रहने की सलाह दी। कई परिवारों में ग्रहण के दौरान सामूहिक रूप से ''हनुमान चालीसा'' और ''महामृत्युंजय मंत्र'' का जाप किया गया। ग्रहण खत्म होते ही दिल्लीवासियों ने घरों में झाड़ू-पोछा कर गंगाजल का छिड़काव किया और स्वयं स्नान कर दान-पुण्य की रस्म निभाई।
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