सड़क हादसे में दिव्यांग हुए बुजुर्ग को मिला 40 लाख का मुआवजा, बीमा कंपनी करेगी वसूली
दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने सड़क दुर्घटना में 100% दिव्यांग हुए 66 वर्षीय बुजुर्ग को 40 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। बीमा कंपनी पहले ...और पढ़ें

दिव्यांग हुए 66 वर्षीय बुजुर्ग को 40 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश।
HighLights
दिल्ली अधिकरण ने 40 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
66 वर्षीय बुजुर्ग राजपाल सिंह 100% कार्यात्मक दिव्यांग हुए।
बीमा कंपनी चालक व मालिक से मुआवजा राशि वसूलेगी।
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने सड़क दुर्घटना में 100 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता का शिकार हुए 66 वर्षीय बुजुर्ग को 40 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही अधिकरण ने बीमा कंपनी को यह राशि पहले पीड़ित को अदा करने और बाद में बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बाइक चला रहे चालक और वाहन मालिक से इसकी वसूली करने का अधिकार भी दिया है।
अधिकरण के पीठासीन अधिकारी सुदीप राज सैनी ने पारित आदेश में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित होता है कि 25 दिसंबर 2018 को आकाश अस्पताल के पास सड़क पार करते समय राजपाल सिंह को तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाई जा रही मोटरसाइकिल ने टक्कर मार दी थी।
दुर्घटना मोटरसाइकिल चालक इरफान की लापरवाही
हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। पहले उन्हें सफदरजंग अस्पताल और बाद में वेंकटेश्वर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अधिकरण ने प्रत्यक्षदर्शी के बयान, विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (डीएआर), समय पर दर्ज प्राथमिकी, चालक के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र और अन्य साक्ष्यों के आधार पर माना कि दुर्घटना मोटरसाइकिल चालक इरफान की लापरवाही के कारण हुई।
दैनिक कार्यों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि दुर्घटना के कारण राजपाल सिंह क्वाड्रिपेरेसिस (चारों अंगों की गंभीर कमजोरी) से ग्रस्त हो गए और उनकी 100 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता हो गई। अब वे दैनिक कार्यों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं। अधिकरण ने भविष्य की आय के नुकसान के लिए 16.63 लाख रुपये, भविष्य में अटेंडेंट की आवश्यकता के लिए 11 लाख रुपये से अधिक और उपचार, दर्द एवं मानसिक पीड़ा, आवागमन और विशेष आहार सहित अन्य मदों में मुआवजा देते हुए कुल 40 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।
अधिकरण ने निर्देश दिया कि मुआवजे की 10 प्रतिशत राशि तत्काल पीड़ित को जारी की जाए, जबकि शेष 90 प्रतिशत राशि मोटर दुर्घटना दावा वार्षिकी जमा योजना के तहत सावधि जमा (एफडी) में रखी जाएगी।
बीमा कंपनी को 30 दिनों के भीतर मुआवजे की राशि
सुनवाई में यह भी स्पष्ट हुआ कि दुर्घटना के समय मोटरसाइकिल का बीमा वैध था, लेकिन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, जो बीमा पालिसी की शर्तों का उल्लंघन है। ऐसे में अधिकरण ने बीमा कंपनी को 30 दिनों के भीतर मुआवजे की राशि जमा करने का निर्देश देते हुए बाद में चालक इरफान और वाहन मालिक इमरान उद्दीन से पूरी राशि वसूलने का अधिकार प्रदान किया।