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मास्टर प्लान-2047 से चमकेगी दिल्ली, पुराने औद्योगिक क्षेत्र बनेंगे आईटी पार्क और स्टार्टअप हब

Published: Fri, 28 Aug 2026 10:30 PM (GMT+05:30)

दिल्ली मास्टर प्लान-2047 के तहत नरेला, ओखला जैसे पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को प्रदूषणकारी उद्योगों से मुक्त कर आधुनिक कारोबारी केंद्रों में बदला जाएगा।

नरेला इंडस्ट्रियल एरिया में बनेगा आईटी पार्क। फोटो: जागरण

नरेला इंडस्ट्रियल एरिया में बनेगा आईटी पार्क। फोटो: जागरण

HighLights

  1. पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को आधुनिक कारोबारी केंद्रों में बदला जाएगा

  2. प्रदूषणकारी उद्योगों की जगह आईटी पार्क और दफ्तर बनेंगे

  3. पर्यावरण सुधार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली के पुराने औद्योगिक इलाकों की तस्वीर आने वाले वर्षों में बदल सकती है। मास्टर प्लान- 2047 में नरेला, ओखला, वजीरपुर, मायापुरी और आनंद पर्वत जैसे इलाकों को प्रदूषणकारी उद्योगों से मुक्त कर आधुनिक कारोबारी केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना है।

इसके तहत धुआं फैलाने वाली और अधिक जगह घेरने वाली फैक्ट्रियों को धीरे-धीरे दिल्ली से बाहर स्थानांतरित किया जाएगा। उनकी जगह आईटी पार्क, रिसर्च सेंटर, स्टार्टअप और आधुनिक दफ्तरों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस बदलाव को ‘ग्रे-टू-ग्रीन’ के रूप में देखा जा रहा है।

जमीन के इस्तेमाल के नियम बदलेंगे

योजना के तहत औद्योगिक जमीन के इस्तेमाल के नियमों में बदलाव किया जाएगा। अभी जिस जमीन का इस्तेमाल मुख्य रूप से फैक्ट्री और उत्पादन के लिए होता है, वहां भविष्य में आईटी कंपनियों, कॉरपोरेट ऑफिस, डिजाइन स्टूडियो, स्टार्टअप और दूसरी गैर-प्रदूषणकारी गतिविधियों की अनुमति दी जा सकेगी।

इसके लिए भू उपयोग बदलने की प्रक्रिया को भी आसान बनाने का प्रस्ताव है। यानी पुरानी फैक्ट्री की जमीन को नए कारोबार के लिए इस्तेमाल करने में मौजूदा कागजी प्रक्रिया की बाधाएं कम होंगी।

पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाले उद्योगों और नए कारोबार को बढ़ावा देने के लिए बहुमंजिला इमारतों की भी अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए अतिरिक्त एफएआर का प्रावधान किया जा सकता है। इससे सीमित जमीन पर अधिक कार्यालय और रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकेंगे।

दिल्ली से बाहर जाएंगी फैक्ट्रियां 

दूसरी ओर, ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली और बड़े क्षेत्र की जरूरत वाली फैक्ट्रियों को दिल्ली से बाहर स्थानांतरित करने की योजना है। इनके लिए हरियाणा के कुंडली और बहादुरगढ़ तथा उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को विकल्प बनाया जा सकता है। इससे शहर के रिहायशी इलाकों के आसपास प्रदूषण कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

नरेला, ओखला और वजीरपुर जैसे इलाकों में इस बदलाव का असर ज्यादा दिखाई दे सकता है। इन क्षेत्रों में उद्योग और रिहायशी इलाके कई जगह आसपास हैं। प्रदूषणकारी इकाइयों की जगह आईटी और सर्विस सेक्टर आने से न केवल पर्यावरण बेहतर हो सकता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं।

हालांकि, इस योजना को लागू करना आसान नहीं होगा। पुराने उद्योगों को बाहर स्थानांतरित करने, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव और कारोबारियों के हितों को संतुलित करना बड़ी चुनौती होगी।

फिर भी एमपीडी -2047 का यह प्रस्ताव लागू हुआ तो दिल्ली के पुराने औद्योगिक इलाकों की पहचान आने वाले समय में फैक्ट्रियों के बजाय आईटी, सर्विस और आधुनिक रोजगार केंद्रों के रूप में हो सकती है।

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में औद्योगिक क्षेत्रों की बेहतरी के लिए जो प्रविधान किए गए हैं, वो वाकई काबिलेतारीफ हैं। लेकिन मेरा साफ मानना है कि इनके क्रियान्वयन में भी गंभीरता और ईमानदारी का परिचय देना जरूरी है। अगर ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर हालात बदलेंगे। अन्यथा यह मास्टर प्लान भी एक कागजी दस्तावेज बनकर रह जाएगा।

-राजीव गोयल, अध्यक्ष, बवाना मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर एसोसिएशन

मास्टर प्लान 2047 से बहुत उम्मीदें बंधी हैं। लेकिन इनके सुनियोजित विकास पर भी पूरी गंभीरता से काम होना चाहिए। औद्योगिक क्षेत्रों में फायर सेफ्टी, सड़कों की मरम्मत, बिजली कनेक्शन मिलने में आसानी इत्यादि बिंदुओं पर भी काम किया जाना चाहिए।

-दिनेश कुमार, अध्यक्ष, दिल्ली प्लास्टिक पैकेजिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

एमपीडी-2047 के माध्यम से दिल्ली के पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने व आईटी, आईटीईएस, रिसर्च एंड डेवलपमेंट , स्टार्टअप, डिजाइन, तकनीकि और अन्य स्वच्छ एवं उच्च-मूल्य वाली गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर पैदा होंगे।

गुरुग्राम, नोएडा व बेंगलुरु व हैदराबाद की तर्ज पर दिल्ली को भी आईटी एवं तकनीकी हब के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं। इससे एनसीआर में युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं तथा नई पीढ़ी के उद्योगों को दिल्ली में ही विकसित होने का मौका मिलेगा।

यदि इस नीति को प्रभावी एवं व्यावहारिक तरीके से लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली एवं एनसीआर में लाखों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

-प्रवीण शर्मा, वित्त सचिव, फेडरेशन आफ ओखला इंडस्ट्रियल एसोसिएशन्स

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