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    दिल्ली में ड्रग कंट्रोल विभाग की कार्रवाई का सच, लाइसेंस रद होने पर भी चल रहे मेडिकल स्टोर

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 05:38 AM (IST)

    ड्रग कंट्रोल विभाग द्वारा लाइसेंस रद्द किए जाने के बावजूद दिल्ली में मेडिकल स्टोर नए नामों से फिर से खुल रहे हैं, जिससे विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठ र ...और पढ़ें

    लाइसेंस हुआ रद तो नाम बदलकर फिर खुल गया मेडिकल स्टोर।

    लाइसेंस हुआ रद तो नाम बदलकर फिर खुल गया मेडिकल स्टोर।

    HighLights

    1. लाइसेंस रद्द होने के बाद भी नए नाम से खुल रहे मेडिकल स्टोर।

    2. पिछले पांच वर्षों में 173 स्टोरों पर हुई कागजी कार्रवाई।

    3. नशीली दवाओं, नकली उत्पादों की बिक्री जारी, कानून संशोधन की मांग।

    शुजाउद्दीन, पूर्वी दिल्ली। नियमों की अनदेखी करने वाले मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निरस्त करने के वाले ड्रग कंट्रोल विभाग का बड़ा खेल सामने आया है। विभाग जिन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस रद करता है, वहां चंद दिनों बाद ही नये नाम से मेडिकल स्टोर खोल दिया जाता है।

    कार्रवाई के नाम पर सफेद कागजाें पर काला झूठ सा लिखा जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में ड्रग्स नियंत्रण विभाग ने राजधानी में 173 मेडिकल स्टोरों पर नशीली दवा बेचने, दवा का रिकॉर्ड न रखने समेत कई मामलों में कार्रवाई है, लेकिन ज्यादातर जगहों पर मेडिकल स्टोर फिर से नए नाम से चल रहे हैं।

    दैनिक जागरण संवाददाता ने विभाग की कार्रवाई की दिल्ली में पड़ताल की। विभाग से कार्रवाई की लिस्ट निकाली और उन पतों पर जाकर यह देखने की कोशिश की वाकई कार्रवाई हो रही है या लोगों की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। वर्ष 2022 से जून 2026 तक विभाग ने 173 मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई की है। अधिकतर स्टोर लाइसेंस निरस्त किए हैं। लिस्ट में जो पते दर्ज थे, उन स्थानों पर मेडिकल स्टोर चलते हुए मिले। लेकिन कार्रवाई के दौरान मेडिकल के जो नाम थे, उसमें अब बदलाव कर दिए गए हैं।

    नशीली दवा का रिकॉर्ड न रखने पर रद किया था लाइसेंस

    झिलमिल स्थित सुपर मेडिकोज नाम के स्टोर पर ड्रग विभाग ने छापेमारी की थी। इस स्टोर में नशीली दवा का रिकार्ड नहीं रखा जा रहा था। विभाग ने गत 12 जून को स्टोर का लाइसेंस निरस्त कर दिया था। यह अब शर्मा मेडिकोज के नाम से चल रहा है। लेकिन इस स्टोर पर सुपर मेडिकोज का पुराना बोर्ड भी लगा है।

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    उधर, कृष्णा नगर स्थित वामिका नाम के मेडिकल स्टोर पर गत दस जून को ड्रग विभाग ने कार्रवाई करते हुए लाइसेंस रद कर दिया था। कार्रवाई के बाद संचालक ने पुरानी दुकान के पड़ोस में फिर से स्टोर खोल लिया।

    कागजों में लाइसेंस कर दिया निरस्त, उसी नाम चल रहा स्टोर

    घोंडा स्थित भावना नाम के मेडिकल स्टोर पर ड्रग विभाग ने 10 जून को छापेमारी की। स्टोर संचालक से नशीली दवा का रिकार्ड मांगा गया तो नहीं मिला। स्टोर का लाइसेंस निरस्त किया गया लेकिन यह स्टोर अभी भावना नाम से ही चल रहा है। दिलशाद गार्डन स्थित मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास ) के मुख्य गेट के ठीक सामने इहबास नाम से मेडिकल स्टोर था।

    मार्च 2022 में ड्रग विभाग ने इस स्टोर पर छापेमारी की। स्टोर से विभाग ने इहबास के मरीजों को दी जाने वाली नोट फार सेल की सरकारी दवाईयां बरामद की थी। लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था। अब इस मेडिकल का नाम संजीवनी इहबास है।

    नकली कास्मेटिक उत्पाद बेचते हुए पकड़ा गया, फिर भी चल मेडिकल स्टोर

    द्वारका सेक्टर-10 स्थित जन सेवा दवा बाजार मेडिकल स्टोर पर ड्रग विभाग ने 30 जनवरी 2024 को छापेमारी की थी। यहां नकली कास्मेटिक उत्पाद मिले थे। विभाग ने स्टोर को बंद करवा दिया था। मौजूदा वक्त में यह स्टोर दवा बाजार नाम से मेडिकल चल रहा है। 31 जुलाई 2024 को ड्रग विभाग ने लक्ष्मी पार्क स्थित श्री गणेश मेडिकोज स्टोर पर छापेमारी की थी। गलत तरीके से स्टोर पर दवाई बेची जा रही थी। यह मेडिकल स्टोर अब राधे कृष्णा मेडिकोज नाम से चल रहा है।

    कानून में संशोधन कर मेडिकल स्टोर होने चाहिए सील

    उत्तर पूर्वी जिला विकास समिति के चेयरमैन जितेंद्र महाजन ने कहा कि ड्रग विभाग का कहना है वह जिस मेडिकल स्टोर पर छापेमारी करता है। उस स्टोर का सिर्फ लाइसेंस रद कर देता है। लेकिन नशीली दवा समेत अन्य मामलों में मेडिकल स्टोर को सील करने का कोई प्रविधान ही नहीं है। इसी का फायदा मेडिकल माफिया उठा रहे हैं। चेयरमैन ने वकालत की कानून में संशोधन होना चाहिए। उधर, मामले में जब ड्रग्स नियंत्रण विभाग के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया।

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