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गर्मी में बेघरों का एकमात्र सहारा भी फेल, दिल्ली के रैन बसेरों में कहीं वाटर कूलर सूखे; तो कहीं पंखे गायब

Updated: Sun, 10 May 2026 08:52 PM (IST)

दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच बेघर लोगों के लिए रैन बसेरों की स्थिति असमान है। मध्य दिल्ली के कई आश्रय गृहों में सुविधाओं का अभाव है, जबकि दक्षिण दिल्ली में व्यवस्थाएं बेहतर पाई गईं, जिस पर सीएचडी ने चिंता व्यक्त की है।

दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच बेघर लोगों के लिए रैन बसेरों की स्थिति असमान है। इमेज एआई

दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच बेघर लोगों के लिए रैन बसेरों की स्थिति असमान है। इमेज एआई

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में सूरज के तेवर तल्ख होने के साथ ही सड़कों पर जीवन बसर करने वाले बेघर लोगों की मुश्किलें बढ़ गई गई हैं। गर्मी में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) के रैन बसेरे ही इन बेसहारा लोगों का एकमात्र सहारा हैं।

रैन बसेरों की पड़ताल में व्यवस्थाओं में असमानता देखने को मिली। जहां एक तरफ मध्य दिल्ली के कई आश्रय गृहों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव दिखा तो वहीं, दक्षिण दिल्ली के कुछ इलाकों में प्रशासन की सक्रियता से बेघरों को थोड़ी राहत मिली है। इस भीषण तपिश में रैन बसेरों के भीतर कहीं वाटर कूलर सूखे मिले, तो कहीं पंखे खराब होने के कारण लोग रात- दिन उमस में बिताने को मजबूर रहे।

मध्य दिल्ली के आसफ अली रोड स्थित रैन बसेरों में स्थिति काफी चिंताजनक पाई गई। यहां गर्मी से बचाव के लिए लगाए गए पंखे अपनी जगह से नदारद मिले। स्थानीय लोगों ने बताया कि पंखे कई दिनों से खराब पड़े थे, जिन्हें महज एक दिन पहले मरम्मत के लिए भेजा गया है।

प्यास बुझाने के लिए लगाए गए वाटर कूलर भी बंद मिले। हैरानी की बात यह है कि सरकारी निर्देशों के बावजूद यहां लू से बचाव के लिए अनिवार्य ओआरएस के पैकेट तक उपलब्ध नहीं थे। महिलाओं के लिए लगाई गई सैनेटरी पैड मशीनें भी नदारद मिली। जामा मस्जिद के मीना बाजार स्थित बसेरे में उपकरण सभी चालू अवस्था में मिले, लेकिन पानी की मोटर खराब होने के कारण लोगों के लिए प्यास बुझाना बड़ी समस्या बनी हुई है।

इसके उलट दक्षिणी दिल्ली के कालकाजी, संत नगर और नेहरू नगर स्थित रैन बसेरों में व्यवस्थाएं तुलनात्मक रूप से संतोषजनक पाई गईं। यहां डूसिब द्वारा गर्मी को देखते हुए समय रहते कूलर और एग्जास्ट फैन की मरम्मत व नए उपकरण लगाने का कार्य पूरा कर लिया गया है।

कालकाजी महिला आश्रय गृह में 20 बेड की क्षमता पर 2 कूलर और 4 पंखे दुरुस्त मिले। वहीं पुरुष आश्रय गृह में 13 बेड पर 4 कूलर और 8 पंखे चलते हुए पाए गए। हालांकि, कुछ तकनीकी खामियां यहां भी दिखीं जैसे कालकाजी पुरुष आश्रय गृह में कूलर खिड़की पर लगाने के बजाय कमरे के भीतर रखकर चलाया जा रहा था, जिससे कमरे में उमस की समस्या बनी हुई थी।

कुछ जगहों पर केयर टेकर की लापरवाही भी दिखी जहां कूलर बिना पानी के चलते पाए गए, जिसका कारण पानी की सीमित आपूर्ति बताया गया।

सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट (सीएचडी) की एक ताजा रिपोर्ट ने दिल्ली के रैन बसेरों की पूरी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक डूसिब दिल्ली में कुल 197 रैन बसेरों का संचालन करता है, जिनमें लगभग 17,000 लोगों के ठहरने की क्षमता है। इनमें से 82 स्थायी कंक्रीट की इमारतें हैं, जबकि अन्य पोर्टेबल केबिन हैं जो गर्मियों में अधिक तपते हैं।

सीएचडी के कार्यकारी निदेशक सुनील कुमार अलेदिया ने इस बदहाली पर कड़ा संज्ञान लेते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि सभी 197 केंद्रों पर खराब कूलिंग इकाइयों की युद्धस्तर पर मरम्मत कराई जाए।

वहीं, इस मामले में डूसिब के एक अधिकारी का कहना है कि सभी रैन बसेरों में रह रहे लोगों के लिए जरूरत की सभी वस्तुएं उपलब्ध करवाई जा रही है। जहां कोई उपकरण खराब है उन्हें ठीक करने के लिए भेजा गया है। जो भी कमियां मौजूद है जल्द ही उनको दुरूस्त कर दिया जाएगा।

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