क्या आपके बच्चे को भी ब्लैक बोर्ड देखने में होती है परेशानी? यहां जानिए मायोपिया और इससे बचने के सात स्टेप्स
दिल्ली में छह लाख से अधिक स्कूली बच्चे मायोपिया से पीड़ित हैं, जिसका मुख्य कारण बढ़ता स्क्रीन टाइम और आउटडोर गतिविधियों में कमी है। ...और पढ़ें

क्या आपका बच्चा ब्लैक बोर्ड पर लिखा साफ नहीं देख पाता तो उसे है मायोपिया। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
दिल्ली में 6 लाख से अधिक स्कूली बच्चे मायोपिया से पीड़ित
बढ़ता स्क्रीन टाइम और कम आउटडोर गतिविधि मुख्य कारण
AIOS ने मायोपिया रोकथाम के लिए '20-20-20 नियम' सुझाया
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। अगर आपका बच्चा स्कूल में पीछे की बेंच पर बैठकर ब्लैक बोर्ड पर लिखा साफ नहीं देख पाता, बार-बार आंखें मिचमिचाता है, टीवी के पास जाकर बैठता है या होमवर्क लिखने में परेशानी महसूस करता है, तो इसे केवल उसकी पढ़ाई में कमजोरी समझने की गलती न करें।
यह मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष का संकेत हो सकता है। इसमें पास की चीजें साफ दिखाई देती हैं, लेकिन कुछ दूर की वस्तुएं धुंधली नजर आती हैं।
एम्स नई दिल्ली के डाॅ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फार आप्थैल्मिक साइंसेज के पूर्व किए गए ‘नार्थ इंडिया मायोपिया स्टडी’ में करीब 50 लाख स्कूली बच्चों वाली दिल्ली के 20 स्कूलों के कक्षा एक से नौ तक के 9,884 बच्चों की जांच की गई थी।
अध्ययन में 13.1 प्रतिशत बच्चे यानी छह लाख से अधिक बच्चे मायोपिया से प्रभावित पाए गए। विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल, टैबलेट, लैपटाप और वीडियो गेम का बढ़ता उपयोग बच्चों की आंखों पर गंभीर असर डाल रहा है। कोविड के बाद ऑनलाइन पढ़ाई और बढ़े स्क्रीन टाइम ने स्थिति को और खराब किया है।
अध्ययन में पाया गया कि जो बच्चे प्रतिदिन दो घंटे से अधिक स्क्रीन देखते हैं और आउटडोर गतिविधियों में कम समय बिताते हैं, उनमें मायोपिया का खतरा तेजी से बढ़ता है।
क्या होता मायोपिया?
मायोपिया को निकट दृष्टि दोष कहा जाता है। स्कूल के बच्चों में ब्लैक बोर्ड साफ न दिखना इसका सामान्य संकेत माना जाता है।
- टीवी के पास जाकर बैठना
- आंखें मिचमिचाकर देखना
- बार-बार सिरदर्द होना
- पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी होना
क्यों होता है?
आंख का फोकस सही जगह पर नहीं बनता, इसलिए पास की चीजें साफ और दूर की चीजें धुंधली दिखती हैं।
खबरें और भी
- लंबे समय तक मोबाइल, लैपटाॅप और टैबलेट का उपयोग
- लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम
- आउटडोर खेलकूद और धूप में कम समय बिताना
- आनुवंशिक कारण
- कम रोशनी में लगातार पढ़ाई करना
एआइओएस ने जारी किए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश
बच्चों में तेजी से बढ़ रहे मायोपिया को लेकर आल इंडिया आप्थैल्मोलॉजिकल सोसायटी (एआइओएस) ने सोमवार को पत्रकारवार्ता में एम्स राजकोट के पद्मश्री डाॅ. जीवन सिंह तितियाल, एम्स नई दिल्ली की डाॅ. नम्रता शर्मा व डाॅ. रोहित सक्सेना ने 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि ‘बचपन में होने वाले मायोपिया की रोकथाम और प्रबंधन’ पर राष्ट्रीय दिशा-निर्देश जारी किए। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सक सलाह पर एट्रोपिन आई ड्राॅप्स, विशेष मायोपिया कंट्रोल चश्मे, आर्थोकेराटोलाॅजी और मल्टीफोकल कांटैक्ट लेंस का उपयोग करें।
ये करें उपाय
- हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड का ब्रेक लेकर 20 फीट दूर देखें
- बच्चे प्रतिदिन कम से कम दो घंटे आउटडोर गतिविधि, खेलकूद व धूप में बिताए
- साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच
- स्कूलों में नियमित दृष्टि जांच कार्यक्रम
- मोबाइल, टैबलेट और अन्य डिजिटल स्क्रीन का समय सीमित
- पढ़ाई या स्क्रीन देखते समय आंखों और किताब/स्क्रीन के बीच उचित दूरी
- पढ़ाई हमेशा पर्याप्त रोशनी में
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