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    सीजेपी के प्रदर्शन-मार्च में शामिल थे 2,873 अपराधी, फेस रिकग्निशन सिस्टम ने पहचाने असामाजिक तत्व

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 07:02 AM (IST)

    दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन और सीजेपी के संसद मार्च में 2,873 आपराधिक छवि के लोग शामिल थे। फे ...और पढ़ें

    सीजेपी के विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च में 2,873 आपराधिक छवि के लोग शामिल थे।

    सीजेपी के विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च में 2,873 आपराधिक छवि के लोग शामिल थे।

    HighLights

    1. जंतर मंतर प्रदर्शन में 2,873 आपराधिक छवि के लोग शामिल।

    2. फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से अपराधियों की हुई पहचान।

    3. 989 अतिगंभीर अपराधों के आरोपितों में हत्यारे, लुटेरे शामिल।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के विरोध और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर मंतर पर काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अपराधियों और असामाजिक तत्वों का आना जाना लगा रहा था। दिल्ली पुलिस की जांच में इसकी पुष्टि हुई है।

    पुलिस के फेस रिकाग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के कैमरे की जद में आने से प्रदर्शन में शामिल हुए 2,873 आपराधिक छवि के लोगों की की पहचान हुई है, जिनमें 989 अतिगंभीर अपराधों के आरोपित हैं। इस बारे में दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार द्वारा गृह मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट को देखें तो स्पष्ट होता है कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में एसे तत्व शामिल होते रहे जो आदतन अपराधी रहे हैं यानी जिन पर एक से अधिक गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। इनमें 42 पर हत्या के दो से अधिक मामले दर्ज हैं।

    एफआरएस द्वारा 41 एसी महिलाएं भी पहचानी गई हैं जिन पर हत्या से लेकर अन्य गंभीर मामलो में केस दर्ज हैं। जबकि एक महिला पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है। पहचाने गए अपराधियों में हत्या के मामलों में 101, लूट और डकैती के मामलों में 284 तथा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में दर्ज मामले वाले 92 लोग शामिल हैं।

    हत्या, दुष्कर्म व पोक्सो के आरोपित भी

    पुलिस सूत्रों के अनुसार ये आपराधिक तत्व जंतर मंतर पर प्रदर्शन में मौजूद होने के अलावा 20 जुलाई को सीजेपी के संसद मार्च में भी शामिल हुए। बता दें कि बिना अनुमति के निकाले गए इस मार्च में भारी हिंसा और उपद्रव हुआ था और भीड़ संसद भवन के निकट तक पहुंच गई थी।

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    रिपोर्ट बताती है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद असामाजिक तत्वों में से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जो बार-बार और लगातार कई वारदात को अंजाम देने में शामिल रहे हैं। प्रदर्शन व मार्च में कुल 101 हत्यारोपित शामिल हुए। 12 पर 10 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज पाए गए। 61 पर दुष्कर्म, 25 पर छेड़छाड़ के मामले हैं जबकि छह पोक्सो के आरोपित हैं। हत्या के प्रयास के 62 आरोपितों में से 25 पर कई केस दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार कैमरे की जद में आने वाले और भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान करने की कोशिश जारी है।

    महिलाओं पर लूट, ड्रग्स व मानव तस्करी के मामले

    एफआरएस के कैमरे द्वारा पहचाई गई नौ महिलाएं पर बच्चों व महिलाओं के खिलाफ अपराधों में आरोपित हैं। प्रदर्शन में 12 ऐसी महिला अपराधी पाई गईं जिनके खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत ड्रग्स तस्करी के मामले दर्ज हैं। इसके अलावा सात महिलाएं लूट और डकैती के मामले में शामिल पाई गईं और चार के खिलाफ अपहरण के मामले दर्ज हैं। हत्या के मामलों में आरोपित महिलाओं में एक ऐसी भी है, जिसे 2023 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुरी में अपने सास-ससुर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

    पुलिस के अनुसार, मृतक दंपती के पास करीब 1.3 करोड़ मूल्य की संपत्ति थी। महिला ने अपने प्रेमी के साथ नई जिंदगी शुरू करने के लिए सास-ससुर का विरोध खत्म करने, संपत्ति बेचने और उससे मिलने वाली रकम हासिल करने के उद्देश्य से उनकी हत्या कर दी थी। हत्या के मामलों में आरोपित तीन महिलाएं आदतन अपराधी भी पाई गईं जिनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    नौ महिलाओं में से एक महिला मानव तस्करी रैकेट में शामिल

    महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में आरोपित नौ महिलाओं में से एक महिला मानव तस्करी रैकेट में शामिल पाई गई। लूट और डकैती के मामलों में चिन्हित एक महिला के खिलाफ कुल पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि मादक पदार्थ तस्करी में शामिल एक महिला के खिलाफ 10 मामले हैं। आपराधिक डोजियर से हुआ सत्यापन पुलिस का कहना है कि पहचान होने के बाद इन सभी की पहचान और आपराधिक पृष्ठभूमि का सत्यापन आपराधिक डोजियर के माध्यम से किया गया।

    दिल्ली पुलिस के 'क्राइम कुंडली' एप्लिकेशन का भी इस्तेमाल

    जांच में दिल्ली पुलिस के 'क्राइम कुंडली' एप्लिकेशन का भी इस्तेमाल किया गया, जिसके जरिए पुलिसकर्मियों को अपराधियों का विस्तृत डाटाबेस उपलब्ध होता है। इसमें उनके आपराधिक इतिहास के साथ-साथ सात प्रकार के बायोमीट्रिक पहचान संकेतक- फिंगरप्रिंट, फेशियल रिकग्निशन डाटा, आइरिस स्कैन, आवाज के नमूने, हस्तलेखन के नमूने, पैरों के निशान और टैटू की जानकारी भी उपलब्ध रहती है।

    एसएचओ के खिलाफ कार्रवाई से हाई कोर्ट का इनकार संसद मार्च के दौरा अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप में पुलिस आयुक्त सहित अन्य के खिलाफ केस की मांग वाली शिकायत की रिसीविंग नहीं देने के लिए कनाट प्लेस एसएचओ पर कार्रवाई का आदेश देने से हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया।

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