दिल्ली में रिटायर्ड कर्नल को किया डिजिटल अरेस्ट, 15.50 लाख ठगे; कंबोडिया-दुबई तक फैले नेटवर्क वाले चार गिरफ्तार
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में साइबर पुलिस ने एक सेवानिवृत्त कर्नल से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 15.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
HighLights
रिटायर्ड कर्नल से डिजिटल अरेस्ट कर 15.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी
4 आरोपी गिरफ्तार, कंबोडिया-दुबई सिंडिकेट से जुड़े तार
देशभर में करोड़ों की धोखाधड़ी में म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम जिले के साइबर पुलिस स्टेशन ने साइबर-धोखाधड़ी के मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। सेना के एक रिटायर्ड कर्नल को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने 15 लाख 50 हजार की धोखाधड़ी की थी। आरोपित साइबर-धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के लिए मददगार (फैसिलिटेटर) के तौर पर काम करते थे।
करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी वाले ट्रांजेक्शन शामिल
जांच में सामने आया है कि वे धोखाधड़ी से हासिल पैसे को ट्रांसफर करने के लिए 'म्यूल' या करंट बैंक अकाउंट का प्रबंध और सप्लाई करते थे। इनके तार कंबोडिया और दुबई से आपरेट करने वाले सिंडिकेट से जुड़े पाए गए है।
मामले में इस्तेमाल किया गया खाता एनसीआरपी पोर्टल पर देशभर की 17 शिकायतों से जुड़ा पाया गया, जिनमें करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी वाले ट्रांजेक्शन शामिल हैं। आरोपितों के पास से चार मोबाइल फोन व छह सिम कार्ड बरामद हुए हैं।
कैसे फंसाया जाल में?
दक्षिणी पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल के मुताबिक मुनिरका एन्क्लेव में रहने वाले सेना के एक रिटायर्ड कर्नल से एनसीआरपी के ज़रिए एक शिकायत मिली, जिसमें 15.50 लाख की साइबर-धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था।
दर्ज शिकायत के मुताबिक उन्हें 15 अप्रैल को एक काॅल आया जिसमें झूठा दावा किया गया कि महाराष्ट्र पुलिस के आदेश पर उनका टेलीफोन कनेक्शन काट दिया जाएगा।
उन्हें एक दूसरे नंबर पर बात करने के लिए कहा गया, जहां पुलिस अधिकारी बनकर बात कर रहे एक जालसाज ने आरोप लगाया कि मनी लान्ड्रिंग, इन्वेस्टमेंट फ्राड और टेररिस्ट फाइनेंसिंग से जुड़े मुंबई में एक गैर-कानूनी बैंक अकाउंट खोलने के लिए उनकी जानकारी का गलत इस्तेमाल किया गया है।
नकली ईडी अरेस्ट वारंट और कोर्ट के पेपर दिखाये
बात को सच साबित करने के लिए, आरोपित ने नकली ईडी अरेस्ट वारंट, कोर्ट के कागज़ात, अग्रिम जमानत का दस्तावेज़ और बाम्बे हाई कोर्ट व आरबीआइ के नकली कम्युनिकेशन जैसे जाली दस्तावेज़ भेजे। पीड़ित और उसकी पत्नी को डिजिटल अरेस्ट में होने का दावा किया। लगातार मानसिक दबाव में, पीड़ित से उसकी संपत्ति की जानकारी ली गई।
साइबर थाने में एफआईआर दर्ज की गई
जालसाजों की ओर से बताए गए निर्देशों के आधार पर 15.50 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। इस पर दक्षिणी पश्चिमी जिले के साइबर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। जांच के लिए एसएचओ इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक की देखरेख व एसीपी आपरेशन संदीप घई की निगरानी में सब इंस्पेक्टर सोमबीर, हेड कांस्टेबल जितेंद्र, पुनीत, मयूरपाल व संदीप की टीम गठित की गई।
राजस्थान में मारा छापा
जांच में पता चला कि धोखाधड़ी से ली गई रकम लुधियाना के एक खाते से चला, जो आरोपित सरबजीत का था। पूछताछ में सरबजीत ने बताया कि उसने अपना करंट अकाउंट सूरज को बेचा था, जिससे उसकी मुलाकात अकाउंट देने वाले बैंक के कर्मचारी संदीप के जरिए हुई थी।
सूरज ने आगे वह खाता नरेश उर्फ लकी को ट्रांसफर कर दिया, जिससे वह टेलीग्राम के ज़रिए संपर्क में आया था। सरबजीत, सूरज और संदीप जयपुर गए थे ताकि अकाउंट किट नरेश उर्फ लकी को सौंप सकें, जिसने इसे साइबर-फ्रॉड सिंडिकेट को उपलब्ध कराया। सुरागों के आधार पर, टीम ने राजस्थान में छापा मारा और नरेश उर्फ लकी को पकड़ा।
देशभर से जुड़ी 17 शिकायतें सामने आईं
लकी ने बताया कि उसने टेलीग्राम के ज़रिए सूरज से करंट अकाउंट लिया था और उसे कंबोडिया और दुबई में बैठे फ्राड ऑपरेटरों को सप्लाई किया था, जिससे स्थानीय खाताधारकों से लेकर अंतरराष्ट्रीय साइबर-फ्रॉड ऑपरेटरों तक की एक चेन का पता चला। लाभार्थी के अकाउंट और एनसीआरपी रिकार्ड की जांच से देशभर से जुड़ी 17 शिकायतें सामने आईं, जिनमें करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी वाले ट्रांजेक्शन शामिल थे।
जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा
इससे पता चलता है कि आरोपित किसी एक ट्रांज़ैक्शन में शामिल होने के बजाय एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे, जो साइबर-धोखाधड़ी के कामों के लिए व्यवस्थित रूप से 'म्यूल' या 'करंट' बैंक अकाउंट हासिल करते और सप्लाई करते थे। पूरे नेटवर्क का पता लगाने, असली लाभार्थियों की पहचान करने और पैसे के पूरे लेन-देन का पता लगाने के लिए जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
आरोपितों की प्रोफाइल
- सरबजीत, निवासी लुधियाना, पंजाब (38 वर्ष): यह उस चालू बैंक खाते (current account) का धारक था जिसमें धोखाधड़ी से ठगे गए ₹15.50 लाख ट्रांसफर किए गए थे। आरोप है कि उसने बिचौलियों की एक चेन के ज़रिए इस खाते को साइबर-धोखाधड़ी करने वालों के इस्तेमाल के लिए सौंप दिया था।
- सूरज, निवासी लुधियाना, पंजाब (30 वर्ष): आरोप है कि इसने बिचौलिए के तौर पर काम किया, चालू खाते (current accounts) हासिल किए और उन्हें सिंडिकेट के सदस्यों तक पहुंचाया। इसने टेलीग्राम के ज़रिए नरेश उर्फ़ लकी से संपर्क किया और उसे खाता/खाता किट उपलब्ध कराई।
- संदीप, निवासी लुधियाना, पंजाब (32 वर्ष): यह खाता उपलब्ध कराने वाले बैंक में कार्यरत था। आरोप है कि इसने बैंकिंग सेक्टर में अपने संपर्कों और जानकारी का इस्तेमाल करके चालू खाते हासिल करने में मदद की और खाता देने वालों को उन लोगों से जोड़ा जो साइबर-धोखाधड़ी के लिए खाते चाहते थे।
- नरेश उर्फ लकी, निवासी सीकर, राजस्थान: आरोप है कि इसने टेलीग्राम के ज़रिए सूरज से खाते हासिल किए और घरेलू सप्लायरों तथा कंबोडिया और यूएई/दुबई में बैठे साइबर-धोखाधड़ी करने वालों के बीच कड़ी का काम किया, उन्हें 'म्यूल अकाउंट' (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) उपलब्ध कराए।
काम करने का तरीका
जांच से 'म्यूल अकाउंट' हासिल करने के एक व्यवस्थित, कमीशन-आधारित मॉडल का पता चला। ऐसे लोगों की पहचान की जाती थी जो अपने चालू बैंक खाते देने को तैयार हों और उन्हें कमीशन के बदले खाते सौंपने के लिए राजी किया जाता था; इसमें संदीप ने बैंकिंग सेक्टर में अपनी नौकरी और संपर्कों का इस्तेमाल करके ऐसे खाते हासिल करने में अहम भूमिका निभाई।
बिचौलियों की एक चेन थी सक्रिय
सूरज स्थानीय खाताधारकों से खाते हासिल करता था और उन्हें टेलीग्राम के ज़रिए मिले संपर्कों को देता था, जबकि नरेश उर्फ़ लकी घरेलू सप्लायरों और विदेश (कंबोडिया और यूएई/दुबई) में बैठे साइबर-धोखाधड़ी करने वालों के बीच कड़ी का काम करता था।
इस तरह उपलब्ध कराए गए खातों का इस्तेमाल विदेश से जुड़े सिंडिकेट द्वारा देशभर में पीड़ितों के साथ की गई धोखाधड़ी की रकम हासिल करने के लिए किया जाता था, जिसमें इस मामले में रिटायर्ड आर्मी कर्नल से ठगे गए 15.50 लाख रुपये भी शामिल थे।
