Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    'क्या पुलिस मार खाती रहे?' गृह मंत्री पर लगे आरोपों और पैलेट गन के दावों पर पूर्व ACP का करारा जवाब

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 09:45 AM (IST)

    दिल्ली पुलिस महासंघ ने सीजेपी के संसद चलो मार्च में हुई हिंसा के दौरान पुलिस कार्रवाई का बचाव किया है। महासंघ ने केंद्रीय गृह मंत्री और पुलिस बल पर लग ...और पढ़ें

    दिल्ली पुलिस महासंघ की प्रेसवार्ता में (मध्य में) पूर्व एसीपी केपी कुकरेती व साथ में (बाएं में ) बैठे उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और राज्यसभा सदस्य बृज लाल। जागरण

    दिल्ली पुलिस महासंघ की प्रेसवार्ता में (मध्य में) पूर्व एसीपी केपी कुकरेती व साथ में (बाएं में ) बैठे उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और राज्यसभा सदस्य बृज लाल। जागरण

    HighLights

    1. पुलिस महासंघ ने संसद मार्च हिंसा में पुलिस कार्रवाई का बचाव किया

    2. केंद्रीय गृह मंत्री पर लगे आरोप बेबुनियाद, पुलिस को आत्मरक्षा का अधिकार

    3. उग्र भीड़ के हिंसक होने पर पुलिस मूकदर्शक नहीं रह सकती

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में सीजेपी के संसद चलो मार्च में हुई हिंसा के दौरान पुलिस द्वारा की कार्रवाई का दिल्ली पुलिस महासंघ की ओर से पूर्व एसीपी केपी कुकरेती ने बचाव करते हुए कहा कि राजनीतिक पार्टी के नेताओं द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री और पुलिस बल पर लगाए जा रहे सभी आरोप बेबुनियाद है।

    संसद में दिए गए बयानों पर क्या बोले पूर्व एसीपी?

    उन्होंने संसद में नेताओं द्वारा दिए जा रहे बयानों पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि संसद में बैठे जिम्मेदार नेताओं के पास न तो पुलिस ट्रेनिंग का कोई अनुभव है और न ही वह कानूनी विशेषज्ञ हैं।

    यहां आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि नेताओं का यह दावा पूरी तरह गलत है कि केंद्रीय गृह मंत्री व्यक्तिगत तौर पर हर जमीनी कार्रवाई का पुलिस को आदेश देते हैं।

    पैलेट गन और पुलिस कार्रवाई पर क्या कहा?

    घटना के समय मौके पर न तो गृह मंत्री मौजूद होते हैं और न ही मुख्यमंत्री या राज्यपाल। वहां तैनात वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ही संसद, सांसदों, आम जनता और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए निर्णय लेता हैं।

    पैलेट गन के इस्तेमाल के दावों पर उन्होंने कहा कि यह केवल जनता के बीच भ्रामक संदेश फैलाने की कोशिश की जा रही है, जो बहुत गलत है।

    बल प्रयोग को लेकर क्या है पुलिस महासंघ का पक्ष?

    पूर्व अधिकारी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हमेशा स्वागत है, लेकिन जब उग्र भीड़ लाठी- पत्थर चलाने लगे, बैरिकेड्स तोड़े और धारा 163 की चेतावनियों को नजरअंदाज करे, तो पुलिस मूकदर्शक नहीं रह सकती।

    खबरें और भी

    ऐसे समय में पुलिस को संसद में घुसपैठ और बड़ी अराजकता को टालने के लिए कानून खुद बल प्रयोग या हवाई फायरिंग की अनुमति देता है। इसके अलावा उन्होंने कमिश्नरेट प्रणाली का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मारा, तो हमारे बड़ी संख्या में घायल जवानों को किसने मारा?

    उन्होंने कहा कि जितना आत्मरक्षा का अधिकार एक आम नागरिक को प्राप्त है, उतना ही अधिकार ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी को भी है। अंत में उन्होंने कहा कि महासंघ घायल जवानों के परिवारों के साथ खड़ा है और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से पूरी तरह संतुष्ट है।

    यह भी पढ़ें- बिना इस्तेमाल ही जर्जर हो गए 24 हजार फ्लैट, JNNURM प्रोजेक्ट पर दिल्ली HC का सवाल- कौन है जिम्मेदार?