जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का फोकस बदला; हिंसा के पीछे फंडिंग, डिजिटल नेटवर्क और मास्टरमाइंड रडार पर
राजधानी में नीट पेपर लीक प्रदर्शन हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया है। अब केवल तोड़फोड़ नहीं बल्कि विदेशी प्रभाव, डिजिटल फंडिंग और सो ...और पढ़ें

एआई का प्रयोग करके पूरे प्रदर्शन के पीछे के मास्टरमाइंड और उपद्रवियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
HighLights
जांच का दायरा अब पूरे इकोसिस्टम तक फैला।
विदेशी प्रभाव, डिजिटल फंडिंग, सोशल मीडिया नेटवर्क जांच में।
एआई से डिजिटल टाइमलाइन, मास्टरमाइंड की तलाश।
रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। राजधानी में नीट पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन में हिंसा के बाद जांच एजेंसी ने जांच का दायरा केवल पत्थरबाजी और तोड़फोड़ तक सीमित नहीं रखा है। एजेंसी अब हिंसा के पीछे काम कर रहे पूरे इकोसिस्टम की परतें खोलने में जुटी हैं।
जांच का दायरा अब विदेशी प्रभाव, डिजिटल फंडिंग, इंटरनेट मीडिया के जरिए भीड़ को संगठित करने वाले नेटवर्क, प्राॅक्सी संगठनों और दुष्प्रचार अभियान तक पहुंच चुका है। जांच एजेंसी का मानना है कि संगठित हिंसा अब केवल सड़क पर दिखाई देने वाली भीड़ का मामला नहीं रह गई है, बल्कि इसके पीछे बहुस्तरीय नेटवर्क सक्रिय हो सकते हैं।
अब रणनीति बदल गई
दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक पहले जांच का मुख्य उद्देश्य घटना में शामिल लोगों की पहचान कर गिरफ्तारी करना होता था, लेकिन अब रणनीति बदल गई है। दिल्ली पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि भीड़ को किसने संगठित किया, किसने डिजिटल माध्यमों से संदेश प्रसारित किए, किसने फंडिंग की, किसने लाॅजिस्टिक सहयोग दिया और किस स्तर पर पूरी गतिविधि का समन्वय किया गया। जांच केवल घटनास्थल तक सीमित न रहकर उसके पीछे मौजूद पूरी श्रृंखला को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
एआई से तैयार होगी पूरी डिजिटल टाइमलाइन
जांच में अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सबसे महत्वपूर्ण औजार बनकर उभर रही है। हजारों घंटे की सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन से रिकार्ड वीडियो, मोबाइल कैमरों की रिकार्डिंग, इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो और लाइव स्ट्रीम को एक साथ जोड़कर संदिग्धों की गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है। अलग-अलग कैमरों से मिली तस्वीरों के आधार पर किसी व्यक्ति की मूवमेंट, घटनास्थल पर उसकी मौजूदगी, अन्य लोगों से संपर्क और पूरी घटनाक्रम की डिजिटल टाइमलाइन तैयार की जा रही है।
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सिर्फ उपद्रवी नहीं, मास्टरमाइंड भी रडार पर
सूत्रों के अनुसार एजेंसी का लक्ष्य केवल हिंसा में शामिल लोगों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि उन लोगों तक पहुंचना भी है जिन्होंने भीड़ जुटाने, दुष्प्रचार फैलाने, डिजिटल समन्वय करने, फंडिंग उपलब्ध कराने या पूरी रणनीति तैयार करने में भूमिका निभाई।
जांच उन लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है जो घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे, लेकिन इंटरनेट मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफार्म या अन्य डिजिटल माध्यमों से पूरी गतिविधि का संचालन कर रहे थे।
इलेक्ट्राॅनिक उपकरण, मोबाइल फोन, लैपटाॅप, हार्ड डिस्क, बैंक लेनदेन, डिजिटल वालेट, इंटरनेट मीडिया गतिविधियां और आनलाइन कम्युनिकेशन इस जांच के महत्वपूर्ण हिस्से बने हुए हैं। एजेंसियां इन सभी कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की पहचान करने का प्रयास कर रही हैं।
डिजिटल फुटप्रिंट बनेगा सबसे बड़ा साक्ष्य
भविष्य में दंगों और संगठित हिंसा से जुड़े मामलों में डिजिटल साक्ष्य सबसे मजबूत आधार बनेंगे। मोबाइल फोन, क्लाउड डाटा, सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकाॅर्डिंग, इंटरनेट मीडिया चैट, लोकेशन हिस्ट्री, बैंक ट्रांजेक्शन और इलेक्ट्रानिक डिवाइस से प्राप्त डाटा को अदालत में प्रमुख साक्ष्य के रूप में पेश किया जाएगा।
यदि किसी व्यक्ति की भूमिका डिजिटल और फारेंसिक साक्ष्यों से सामने आती है तो उसके खिलाफ प्राथमिकी, गिरफ्तारी, आरोपपत्र और अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूलने की प्रक्रिया भी डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा सकती है।
जांच की रणनीति में बड़ा बदलाव
सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी ने अब हिंसा की जांच के लिए इंसिडेंट बेस्ड की बजाय नेटवर्क बेस्ड माडल अपनाना शुरू कर दिया है। उद्देश्य केवल घटना का पर्दाफाश करना नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है जो अफवाह, डिजिटल प्रचार, फंडिंग, भीड़ जुटाने और हिंसा को अंजाम देने तक सक्रिय रहता है।
एजेंसियों का मानना है कि तकनीक के इस दौर में किसी भी व्यक्ति के डिजिटल फुटप्रिंट को पूरी तरह मिटा पाना आसान नहीं है। यही कारण है कि अब प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के साथ-साथ इलेक्ट्रानिक और वैज्ञानिक साक्ष्य जांच की सबसे मजबूत कड़ी बनते जा रहे हैं।
यदि यह रणनीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो भविष्य में संगठित हिंसा, दंगों और बड़े स्तर पर अशांति फैलाने की कोशिशों पर अधिक प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सकेगा।