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    दिल्ली जल बोर्ड के गड्ढे में गिरकर युवक की मौत पर सवालों के घेरे में पुलिस, स्वजन बोले-सर्च ऑपरेशन महज खानापूर्ति

    Updated: Fri, 06 Feb 2026 07:47 PM (GMT+05:30)

    कमल ध्यानी की दिल्ली जल बोर्ड के गड्ढे में गिरकर मौत के मामले में उनके स्वजनों ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। स्वजनों का आरोप ...और पढ़ें

    डीडीयू मोर्चरी के बाहर पुलिस को घटना से जुड़ी जानकारी देते नरेश ध्यानी, पीले रंग के कुर्ते में।

    डीडीयू मोर्चरी के बाहर पुलिस को घटना से जुड़ी जानकारी देते नरेश ध्यानी, पीले रंग के कुर्ते में।

    HighLights

    1. कमल ध्यानी की दिल्ली जल बोर्ड के गड्ढे में मौत हुई।

    2. स्वजनों ने पुलिस के सर्च ऑपरेशन को असंवेदनशील बताया।

    3. दिल्ली जल बोर्ड पर बैरिकेडिंग न करने की लापरवाही का आरोप।

    जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड के गड्ढे में गिरकर मोटरसाइकिल सवार कमल ध्यानी नामक युवक की मौत के मामले में स्वजन ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली को पूरी तरह असंवेदनशील करार दिया है। इनका कहना है कि इस मामले में दिल्ली जल बोर्ड की कार्यप्रणाली जहां अक्षम्य है। वहीं, दिल्ली पुलिस का रवैया पूरी तरह असंवेदनशील है।

    मोबाइल की रोशनी में तलाशी

    कमल के जुड़वा भाई करण इस मामले में कहते हैं कि पुलिस की असंवेदनशीलता का पता इसी बात से चलता है कि जिस सर्च ऑपरेशन को पूरी गंभीरता व तैयारी के साथ चलाना था, उसे केवल चंद लोगों के मोबाइल की रोशनी में चलाया गया। इसमें हमलोग भी शामिल थे।

    पुलिस ने अंधेरे में मारा तीर

    उन्होंने आगे कहा कि कमल का मोबाइल ऑन था, बेल जा रही थी। ऐसे में पुलिस को मोबाइल की सटीक लोकेशन का पता लगाना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने किसी पेशेवर की तरह नहीं बल्कि औपचारिकता निभाते हुए सटीक लोकेशन के बजाय ऐसे लोकेशन के बारे में बताया जो घटनास्थल से करीब 200 मीटर की दूरी पर था। यह हवा में तीर उछालने वाली बात थी।

    पुलिस के पास संसाधन क्यों नहीं थे?

    कमल अपनी व्यथा बताते हुए कहते हैं कि पुलिस हमारे साथ पार्क में गई। पार्क में मोबाइल टाॅर्च की रोशनी में जितना संभव था ढूंढा, लेकिन इसके बाद आस-पास रात के अंधेरे में बिना उचित रोशनी के कोई क्या कर सकता था। पुलिस ने लाइटिंग का इंतजाम क्यों नहीं किया? जब सभी घटनास्थल पर बने मौत के गड्ढे के पास पहुंचे, तब भी मोबाइल टार्च की रोशनी में किसी को कुछ नहीं दिखा। हमारे पास तो संसाधन नहीं थे, लेकिन पुलिस के पास तो संसाधन होने चाहिए थे।

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    सटीक लोकेशन तक नहीं निकाल सकी

    अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए वे कहते हैं, 'क्या रात में बिना उचित रोशनी के इंतजाम में कोई सर्च ऑपरेशन चलाया जा सकता है। स्पष्ट है पुलिस ने इस पूरे मामले को हल्के में लिया। पुलिस की कार्रवाई को सर्च ऑपरेशन नहीं कहा जा सकता है, वह भी तब जबकि जोगिंदर सिंह मार्ग पर जगह-जगह खोदाई की गई थी। पुलिस सटीक लोकेशन तक नहीं निकाल सकी।'

    पुलिस स्वजन के साथ घूमती रही

    बकौल मृतक के भाई, पुलिस ने बाद में कहा कि इस बात की भी संभावना है कि पार्क के 200 मीटर के आस-पास मोबाइल कहीं हो। मगर 200 मीटर के दायरे में पुलिस का सर्च ऑपरेशन के प्रति कहीं कोई गंभीर प्रयास नजर नहीं आया। वे सिर्फ स्वजन के साथ घूमते रहे। अपनी ओर से कोई कोशिश नहीं की।

    गार्ड की तैनाती तक नहीं 

    सुबह जब शव मिला तो पुलिस को तत्काल इस मामले पर स्वजन से बात करनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने कोई काॅल नहीं किया। दिल्ली जल बोर्ड ने खोदाई स्थल पर कोई बैरिकेडिंग या गार्ड की तैनाती नहीं की। यहां गड्ढा काफी गहरा था, ऐसे में यहां गार्ड की तैनाती होनी चाहिए थी, लेकिन यहां कुछ भी नहीं था।

    दिल्ली पुलिस का पक्ष

    देर रात 2:50 बजे, शिकायतकर्ता करण ध्यानी जनकपुरी पुलिस स्टेशन में पहुंचे और अपने भाई कमल ध्यानी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस स्टेशन में उन्होंने एसआइ अवंत से मुलाकात की। एसआई अवंत ने तुरंत लापता व्यक्ति के मोबाइल की लोकेशन ट्रेस की, जो पोसंगीपुर पार्क, जनकपुरी के पास दिख रही थी।

    इसके अलावा, कमल का विवरण, फोटोग्राफ और वाहन की जानकारी वेस्ट डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम, सभी थानाध्यक्ष के ग्रुप और जनकपुरी पुलिस स्टेशन के वाट्सएप ग्रुप में तुरंत साझा की गई। लोकेशन के आधार पर पार्क और आसपास के पार्किंग स्थलों व कालोनी में परिवार के सदस्यों के साथ पुलिसकर्मी द्वारा लगातार कई घंटों तक तलाश की गई।

    हालांकि, कमल या उनका वाहन कहीं नहीं मिला। सुबह आठ बजे, जनकपुरी पुलिस स्टेशन को पीसीआर काॅल मिली कि जोगिंदर सिंह मार्ग पर एक खोदाई वाले गड्ढे में एक व्यक्ति गिर गया है।

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