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1 साल की तलाश का दुखद अंत, दिल्ली पुलिस ने ढूंढ निकाला परिवार; 38 वर्षीय बेटे की 'अस्थियां' सौंपी

Published: Tue, 25 Aug 2026 04:33 PM (IST)

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने एक साल से लापता मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक राज कुमार की अस्थियां उसके परिवार को सौंपी, जिससे उन्हें अंतिम संस्कार करने का मौका मिला।

एक साल की तलाश के बाद मिलीं बेटे की अस्थियां। फोटो: एआई जनरेटेड

एक साल की तलाश के बाद मिलीं बेटे की अस्थियां। फोटो: एआई जनरेटेड

HighLights

  1. क्राइम ब्रांच ने एक साल बाद लापता युवक की अस्थियां सौंपी

  2. मानसिक रूप से अस्वस्थ राज कुमार की दुखद मृत्यु हुई

  3. पुलिस की मेहनत से परिवार को अंतिम संस्कार का अवसर मिला

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। अपने के बिछड़ने का दर्द और फिर उनके लौटने की उम्मीद के बीच एक परिवार ने करीब एक साल गुजार दिया। 38 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ राज कुमार लापता हुआ तो परिवार ने उसे ढूंढने की हर कोशिश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

किस्मत ने जब राज कुमार की जिंदगी छीन ली, तब भी कहानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। क्राइम ब्रांच की मानव तस्करी निरोधक दस्ते की कोशिशों ने परिवार को कम से कम इतनी राहत जरूर दी कि उन्हें अपने बेटे की अस्थियां मिल सकीं। अब परिवार अपने रीति-रिवाज के अनुसार उन्हें हरिद्वार ले जाकर विसर्जित कर सकेगा।

एक साल से बेटे की तलाश में था परिवार

22 अगस्त 2025 को अमन विहार थाने में सतीश गुप्ता ने अपने 38 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटे राज कुमार के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिवार महीनों तक उसे तलाशता रहा, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।

राज कुमार को नशे की लत थी। बीमारी के दौरान इलाज के बाद उसने नशा करना छोड़ दिया था। कुछ समय बाद उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई। वह पहले भी कई बार घर से चला जाता था और दो-चार दिन बाद लौट आता था। अगस्त 2025 में घर से जाने के बाद वह नहीं लौटा तो परिवार ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

घायल मिला, अपनी पहचान नहीं बता सका

करीब आठ महीने बाद 20 अप्रैल को एक आश्रय गृह के कर्मचारियों की नजर सूरजमल रोड मेट्रो स्टेशन के पास बेबस और घायल हालत में पड़े एक युवक पर पड़ी। युवक के सिर में चोट थी और दोनों पैर टूटे हुए थे। वह अपनी पहचान बताने में असमर्थ था।

आश्रय गृह के कर्मचारियों ने नांगलोई थाने को सूचना दी और युवक को पूठ कलां स्थित 'अपना घर आश्रम' में रखवा दिया। पुलिस के अनुसार, आश्रय गृह की गाड़ियां क्षेत्र में घूमती रहती हैं। इसी दौरान कर्मचारियों की नजर युवक पर पड़ी थी।

परिवार तक पहुंचने से पहले थम गई जिंदगी

पिछले सप्ताह राज कुमार की तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर आश्रम के सुमित कुमार ने क्राइम ब्रांच से संपर्क किया और उसके स्वजन की तलाश में मदद मांगी।

इसके बाद डीसीपी चंद्र कुमार सिंह, एसीपी सुरेश कुमार, इंस्पेक्टर मुकेश कुमार और एएसआइ अजय कुमार झा की टीम ने राज कुमार के परिवार का पता लगाने का जिम्मा उठाया।

एएसआई अजय कुमार झा ने आश्रम पहुंचकर युवक से बातचीत की, मैनुअल इनपुट जुटाए और तकनीकी सर्विलांस की मदद ली। टीम ने पुरानी गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाली तो आखिरकार अमन विहार थाने में दर्ज राज कुमार की गुमशुदगी की रिपोर्ट तक पहुंच गई।

पुलिस टीम किराड़ी स्थित सतीश गुप्ता के पुराने पते पर पहुंची तो पता चला कि परिवार वहां से मकान खाली कर चुका है। टीम परिवार तक पहुंचने के करीब थी, लेकिन इसी बीच 18 अगस्त को बीमारी के कारण राज कुमार की अस्पताल में मौत हो गई।

परिवार को बेटे की मौत की खबर तक नहीं थी

बवाना पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद आश्रम के कर्मचारियों ने राज कुमार का अंतिम संस्कार कर दिया और उसकी अस्थियां हरिद्वार में विसर्जन के लिए सुरक्षित रख लीं।

राज कुमार के परिवार को अब भी यह पता नहीं था कि जिस बेटे की वे करीब एक साल से तलाश कर रहे थे, वह दुनिया में नहीं रहा।

पुलिस ने परिवार तक पहुंचाईं अस्थियां

क्राइम ब्रांच की टीम ने इसके बाद भी तलाश जारी रखी। 24 अगस्त को पुलिस को सतीश गुप्ता के नए घर का पता मिल गया। टीम उनके छोटे बेटे को लेकर आश्रम पहुंची और उसे राज कुमार से संबंधित फोटो और वीडियो दिखाए। पहचान की पुष्टि होने के बाद परिवार तक राज कुमार के निधन की जानकारी पहुंची।

पुलिस की इस कोशिश से परिवार को अपने बेटे की अस्थियां भी मिल सकीं। आश्रम में सुरक्षित रखी अस्थियां उसके भाई को सौंप दी गईं, ताकि परिवार उन्हें हरिद्वार ले जाकर अपने रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम विदाई दे सके।

जिंदगी बचाने में देर हो गई, लेकिन करीब एक साल से अपने बेटे की तलाश में भटक रहे परिवार को कम से कम उसकी आखिरी निशानी तक पहुंचाने में पुलिस की कोशिश कामयाब रही।

हमारे लिए हर लापता व्यक्ति प्राथमिकता है। हम सिर्फ जिंदा लोगों को ही तलाशने का काम नहीं करते, बल्कि हर परिवार को उनके अपनों से जुड़ा हक दिलाने की कोशिश करते हैं।
- एचजीएस धालीवाल, विशेष आयुक्त, क्राइम ब्रांच

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