दिल्ली में सड़क खराब है तो बस QR कोड स्कैन कीजिए, 'नो योर रोड' सीधा PWD मंत्री तक पहुंचाएगा आपकी शिकायत
पीडब्ल्यूडी दिल्ली में सड़कों के लिए क्यूआर कोड पहल शुरू कर रहा है, जिससे नागरिक सड़क की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। यह 'नो ...और पढ़ें

नो योर रोड के तहत क्यूआर स्कैन कर मिलेगी पूरी जानकारी। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
पीडब्ल्यूडी सड़कों के लिए क्यूआर कोड पहल शुरू करेगा
'नो योर रोड' से मिलेगी सड़क की पूरी जानकारी
पायलट प्रोजेक्ट में 100 जगहों पर लागू होगा
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। आम लोगों के सामने अब सड़क की जन्मकुंडली होगी। सड़क की शिकायतों के लिए पीडब्ल्यूडी क्यूआर कोड पहल शुरू करने जा रहा है। लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा ने गत मार्च में इसकी घोषणा की थी।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने इस सेवा के लिए टेंडर जारी कर दिया है। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि यह पहल जल्द ही लागू की जाएगी, इस पर काम किया जा रहा है। ये क्यूआर कोड नई बनने वाली सड़कों पर लगेंगे।
अपनी सड़क के बारे में जानेंगे
जिसके तहत लोग सड़क पर लगे क्यू आर कोड पर अपनी सड़क के बारे में जान सकेंगे और खराब हालत होने पर उसकी शिकायत भी इस कर सकेंगे। इस पर लिखा जाएगा कि 'नो योर रोड' यानी अपनी सड़क के बारे में जानिए।
अधिकारियों के अनुसार कई कदम उठाने के बावजूद अभी लोगों के पास शिकायतें देने, सड़क बनने की हिस्ट्री जानने और मेंटेनेंस रिकार्ड चेक करने के लिए कोई सीधी सुविधा नहीं है। अब पीडब्ल्यूडी एक पोर्टल बनाएगा, जहां क्यूआर कोड स्कैन करके शिकायतें दी जा सकेंगी।
क्यूआर लगाने के लिए टेंडर मंजूर
पीडब्ल्यूडी के तहत 1440 किलोमीटर सड़क पर ऑनलाइन सर्विस डेवलप करने और क्विक रिस्पान्स (क्यूआर) कोड लगाने के लिए एक टेंडर को मंजूरी दे दी गई है। 'नो योर रोड' पहल के तहत, शिकायत सुलझाने के लिए एक आनलाइन मॉनिटरिंग डैशबोर्ड भी बनाया जाएगा, जो क्यूआर कोड से जुड़ा होगा।
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प्रोजेक्ट प्लान में कहा गया है, इस पहल से पादर्शिता, जवाबदेही, तेजी से शिकायत सुलझाने और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट में लोगों का भरोसा बढ़ेगा।
क्यूआर कोड सड़क के साइनबोर्ड पर लगाए जाएंगे और उन्हें स्कैन करके, कोई भी व्यक्ति बिना कोई मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड किए सड़क की की जानकारी, ठेकेदारकी जानकारी, अभियंताओं की जानकारी, काम का इतिहास, शिकायत का स्टेटस और चल रहे मेंटेनेंस अपडेट्स को तुरंत स्कैन करके देख सकेंगे।
शुरुआत में, पायलट प्रोजेक्ट 100 जगहों पर शुरू किया जाएगा, और बाद में दूसरी जगहों को भी कवर किया जाएगा।
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