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चार साल के 'एक्शन प्लान' से दिल्ली के रिज जंगलों का होगा कायाकल्प, विलायती कीकर हटाकर लगाए जाएंगे देशी पेड़

Published: Sun, 15 Mar 2026 04:21 PM (IST)

वन विभाग ने दिल्ली के रिज क्षेत्र से आक्रामक 'विलायती कीकर' को हटाने के लिए चार-वर्षीय पारिस्थितिक बहाली परियोजना बनाई ...और पढ़ें

रिज के जंगलों को वापस मिलेगी उनकी असली पहचान। (AI Generated Image)

रिज के जंगलों को वापस मिलेगी उनकी असली पहचान। (AI Generated Image)

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राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी की जीवनरेखा माने जाने वाले ''रिज'' के जंगलों को अब उनकी असली पहचान वापस मिलने वाली है। वन विभाग ने रिज क्षेत्र से आक्रामक ''विलायती कीकर'' और अन्य बाहरी प्रजातियों को हटाने के लिए महत्वाकांक्षी चार-वर्षीय पारिस्थितिक बहाली परियोजना की योजना बनाई है।

अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अनुमोदित एक ''वर्किंग प्लान'' का हिस्सा है।

इसे दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के वनों के लिए 2026 -27 से 2036-37 की अवधि के लिए तैयार किया गया है। पिछले महीने दिल्ली वृक्ष प्राधिकरण की बैठक में भी इस पर विस्तार से चर्चा की गई थी।

मूल जैव विविधता के लिए खतरा है कीकर

योजना में विलायती कीकर, ल्यूकेना ल्यूकोसेफला और नीलगिरी जैसी प्रजातियों को दिल्ली की स्थानीय जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा माना गया है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य और दक्षिण अमेरिका का मूल निवासी ''विलायती कीकर'' लगभग एक सदी से दिल्ली में मौजूद है। यह इतनी तेजी से फैलता है कि इसके घने वितान सूरज की रोशनी को जमीन तक नहीं पहुँचने देते, जिससे स्थानीय पेड़-पौधे पनप नहीं पाते।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'चूंकि रिज क्षेत्र न्यायिक संरक्षण के अधीन है, इसलिए इस योजना को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अंतिम मंजूरी की आवश्यकता होगी। वन क्षेत्र में किसी भी बड़े हस्तक्षेप के लिए अदालत की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।'

6,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि का होगा कायाकल्प

दस्तावेजों के अनुसार, अगले चार वित्तीय वर्षों में लगभग 6,303.55 हेक्टेयर क्षेत्र में बहाली और पौधारोपण का कार्य किया जाएगा। योजना का चरणबद्ध विवरण इस प्रकार है:-

वर्षवार लक्षित क्षेत्र और पौधरोपण विवरण

वर्ष लक्षित क्षेत्र (हेक्टेयर) कुल पौधे (लाख में) मुख्य विवरण
2026-27 1,490 28.56 14.27 लाख पेड़ और 14.29 लाख झाड़ियां/बांस।
2027-28 1,670 25.85 मुख्य रूप से झाड़ियों और लताओं पर ध्यान।
2028-29 1,450.55 24.43 स्थानीय प्रजातियों का रोपण।
2029-30 1,693 21.62 —

क्यों जरूरी है यह कदम?

दिल्ली के 1,483 वर्ग किमी क्षेत्र का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र है। चिंता की बात यह है कि इस हरियाली का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले कीकर के कब्ज़े में है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कीकर को हटाकर वहां स्वदेशी पेड़, झाड़ियाँ, लताएं और बांस लगाने से न केवल भूजल स्तर में सुधार होगा, बल्कि दिल्ली का प्राकृतिक इकोसिस्टम भी मजबूत होगा।

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