दिल्ली दंगा के दौरान स्कूल आगजनी मामले में मोहम्मद फैजान बरी, एफआईआर में देरी और गवाही में विरोधाभास बना आधार
2020 दिल्ली दंगों में बृजपुरी के अरुण मॉडर्न पब्लिक स्कूल आगजनी मामले में मोहम्मद फैजान बरी हो गए। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने ...और पढ़ें

मोहम्मद फैजान 2020 दिल्ली दंगा आगजनी मामले में बरी।
HighLights
मोहम्मद फैजान 2020 दिल्ली दंगा आगजनी मामले में बरी
एफआईआर दर्ज करने में 10 दिन की देरी मुख्य कारण बनी
पुलिस गवाही में विरोधाभास के कारण संदेह का लाभ मिला
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 के दौरान भड़के दंगों में बृजपुरी क्षेत्र स्थित अरुण माॅडर्न पब्लिक स्कूल में आगजनी के मामले में अदालत ने आरोपित मोहम्मद फैजान को बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार सिंह की अदालत ने रिकाॅर्ड पर मौजूद तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि आगजनी की घटना 25 फरवरी 2020 की बताई गई है, जबकि इस संबंध में एफआईआर 5 मार्च 2020 को दर्ज की गई।
एफआईआर दर्ज करने में हुई लगभग दस दिन की देरी को लेकर अभियोजन कोई ठोस और विश्वसनीय कारण प्रस्तुत नहीं कर सका। अदालत के अनुसार, ऐसी देरी से मामले की सत्यता पर स्वाभाविक रूप से संदेह उत्पन्न होता है।
मामले में पुलिस ने कुल तीन लोगों शमीम अहमद, मोहम्मद काफिल और मोहम्मद फैजान को आरोपित बनाया था। सुनवाई के दौरान शमीम अहमद और मोहम्मद काफिल को साक्ष्यों के अभाव में पहले ही बरी कर दिया गया था। तीसरा आरोपित मोहम्मद फैजान लंबे समय तक फरार रहा, जिसकी गिरफ्तारी अगस्त 2025 में की गई थी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन का पूरा मामला एक पुलिसकर्मी की गवाही पर आधारित था, लेकिन अलग-अलग मुकदमों में दिए गए उसके बयानों में गंभीर विरोधाभास पाए गए। कहीं उसने घटनास्थल पर मौके से आरोपित की पहचान करने की बात कही, तो कहीं उसने पहले से सूचना मिलने का दावा किया।
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अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में आरोपित की पहचान संदेह के घेरे में आ जाती है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में संदेह का लाभ आरोपित को दिया जाना कानून का मूल सिद्धांत है। इन्हीं आधारों पर अदालत ने आरोपित मोहम्मद फैजान को सभी आरोपों से बरी कर दिया।